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नरेंद्र मोदी हुए ‘नीति आयोग’ की पहली बैठक में शामिल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को नवगठित राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (नीति आयोग) की पहली बैठक में देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों के साथ आर्थिक हालात और आगामी बजट पर गहण मंत्रणा के साथ ही सहकारी संघवाद और विकास के लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की वकालत की। योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग […]
Author February 6, 2015 17:32 pm
नीति आयोग की पहली बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने बजट पर अर्थशास्त्रियों के सुझाव सुने (फाइल फ़ोटो)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को नवगठित राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (नीति आयोग) की पहली बैठक में देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों के साथ आर्थिक हालात और आगामी बजट पर गहण मंत्रणा के साथ ही सहकारी संघवाद और विकास के लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की वकालत की। योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग के गठन के बाद प्रधानमंत्री पहली बार इसके कार्यालय आये थे। प्रधानमंत्री इस आयोग के अध्यक्ष हैं।

उन्होंने अर्थशास्त्रियों के साथ विचार-विमर्श किया है जिसमें सरकार को उच्च विकास की दिशा में काम करने स्थिर कर तंत्र वित्तीय अनुशासन और तीव्र इंफ्रास्ट्रक्‍चर विकास पर ध्यान केन्द्रित करने के सुझाव दिये गये। मोदी ने अर्थशास्त्रियों से कहा कि नीति आयोग का एक मुख्य उद्देश्य बहुआयामी संस्थागत तंत्र बनाना है जहां सरकारी तंत्र से बाहर के प्रबुद्ध व्यक्‍तियों की नीति निर्माण में भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने परिचर्चा के क्षेत्र का उल्लेख करते हुये सहकारी संघवाद पर जोर दिया और राज्यों के बीच विकास के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की वकालत की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक हालात का लाभ उठाते हुए लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए भारत को तीव्र विकास की दरकार है। उन्होंने सरकार की हाल की योजनाओं प्रधानमंत्री जन धन योजना, स्वच्छ भारत मिशन और रसोई गैस सब्सिडी के प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण का उल्लेख करते हुये अर्थशास्त्रियों से सुझाव मांगे। बैठक में भाग लेने वाले अर्थशास्त्रियों में अशोक गुलाटी, बिमलजालान, जी.एन. बाजपेयी, मुकेश बुटानी, नितिन देसाई पार्थसारथी शोम, पी. बालाकृष्णन, राजीव लाल, आर. वैद्यनाथन, राजीव कुमार, सुबीर गोकर्ण और विजय केलकर शामिल है।

आधिकारिक बयान के अनुसार परिचर्चा के दौरान अर्थशास्त्रियों ने तीव्र आर्थिक विकास की दिशा में सरकार को काम करने का सुझाव दिया। इसके अतिरिकत उन्होंने स्थायी कर तंत्र वित्तीय अनुशासन और इंफ्रास्ट्रक्‍चर विकास में गति लाने की भी अपील की। अर्थशास्त्रियों ने अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को लेकर कई सुझाव दिये। इस बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ ही आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढिया ने भी अर्थशास्त्रियों को संबोधित किया तथा आयोग के पूर्णकालिक सदस्य डॉ. बिबेक देबराय, डॉ. वी.के. सारस्वत और आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अतिरिक्‍त मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. अरविन्द सुब्रमण्यम भी मौजूद थे। उनके अतिरिक्‍त प्रधानमंत्री कार्यालय वित्त मंत्रालय और आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

 

 

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