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मोदी सरकार तीन बड़ी कंपनियों का करेगी निजीकरण, पावर सेक्टर की इन कंपनियों में भी बेची जाएगी हिस्सेदारी

बीपीसीएल के अलावा मालवाहक कंपनी कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और शिपिंग कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड भी प्राइवेट हाथों में सौंपी जाएगी। सरकार ने इन कंपनियों की रणनीतिक बिक्री के साथ-साथ मैनेजमेंट कंट्रोल भी निजी कंपनियों को देगी।

Author नई दिल्ली | Updated: November 21, 2019 8:11 AM
नई दिल्ली में बुधवार रात प्रेस को संबोधित करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। (फोटोः पीटीआई)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार (20 नवंबर) को सार्वजनिक क्षेत्र की तीन बड़ी कंपनियों के निजीकरण करने का फैसला किया है। इनमें सबसे अहम है पेट्रोलियम क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) जो लंबे समय से घाटे में चल रही थी। सरकार ने इसे बेचने का फैसला किया है। हालांकि, इस कंपनी के तहत आने वाली असम स्थित नुमालीगढ़ रिफायनरी लिमिटेड इस बिक्री योजना से बाहर होगी।

बीपीसीएल के अलावा मालवाहक कंपनी कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और शिपिंग कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड भी प्राइवेट हाथों में सौंपी जाएगी। सरकार ने इन कंपनियों की रणनीतिक बिक्री के साथ-साथ मैनेजमेंट कंट्रोल भी निजी कंपनियों को देगी।

सरकार पावर सेक्टर की टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) इंडिया लिमिटेड के 74.23 फीसदी हिस्सेदारी और नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NEEPCO) की सभी 100 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी कंपनी नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन को बेचेगी।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक के बाद मीडियाकर्मियों को जानकारी देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि CCEA ने प्रबंधन नियंत्रण को बनाए रखते हुए केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) में सरकारी हिस्सेदारी 51 फीसदी से नीचे रखने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

सीतारमण ने चालू वित्तीय वर्ष के अपने बजट भाषण में  2018-19 में 80,000 करोड़ रुपये की तुलना में 1,05,000 करोड़ रुपये विनिवेश प्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया था। इस बीच बाजार विश्लेषकों  का मानना है कि 31 मार्च 2020 को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले तीनों कंपनियों की रणनीतिक बिक्री को पूरा करना सरकार के लिए एक चुनौती होगी।

BPCL में सरकार अपनी 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया में हिस्सेदारी की बिक्री 63.75 प्रतिशत होगी। CONCOR में सरकार अपनी 54.8 प्रतिशत की कुल हिस्सेदारी में से 30.8 प्रतिशत बेचेगी। सूत्रों ने कहा कि केंद्र रेलवे क्षेत्र में अपनी अहमियत को देखते हुए CONCOR में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रखना चाहता है, बावजूद इसके CONCOR का पूरा प्रबंधन निजी हाथों में हस्तांतरित कर देगा क्योंकि सरकार की शेष हिस्सेदारी 26 प्रतिशत की महत्वपूर्ण सीमा से नीचे होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संवाददाताओं को यह जानकारी देते हुए कहा कि नुमालीगढ़ रिफाइनरी को बीपीसीएल के नियंत्रण से बाहर कर सरकार पेट्रोलियम कंपनी में अपनी 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। इसके अलावा सरकार टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कार्पोरेशन (टीएचडीसी), और नार्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लि. (एनईईपीसीओ) में अपनी हिस्सेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी लि. को बेचेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि इसके अलावा मंत्रिमंडल ने प्रबंधन नियंत्रण अपने पास रखते हुए चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से नीचे लाने को भी मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि बीपीसीएल के निजीकरण से पहले नुमालीगढ़ रिफाइनरी को उससे अलग किया जाएगा और किसी दूसरी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी द्वारा इसका अधिग्रहण किया जायेगा।

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