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इन्फोसिस के नारायणमूर्ति बोले, अब खुलना चाहिए लॉकडाउन, लंबा चला तो कोरोना से ज्यादा लोग भूख से मर जाएंगे

उन्होंने कहा, 'हमें सबसे ज्यादा इस बात को समझने की जरूरत है कि लंबे समय तक भारत इस हालात में नहीं रह सकता। ऐसा चलता रहा तो एक समय ऐसा आ जाएगा, जब कोरोना से ज्यादा मौतें भूख के चलते हो जाएंगी।'

नारायणमूर्ति ने दिया लॉकडाउन में राहत देने का सुझाव

कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन को खोलने के लिए अब उद्योग जगत से आवाजें उठने लगी हैँ। देश की दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायणमूर्ति ने कहा है कि यदि लॉकडाउन लंबा चला तो कोरोना से ज्यादा लोग भूख से मारे जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश को कोरोना के संकट के साथ ही काम शुरू करना होगा। ऐसे लोगों को काम का मौका दिया जाना चाहिए, जो काम कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हमें कोरोना ‘न्यू नॉर्मल’ सिचुएशन के तौर पर स्वीकार करना होगा। बुधवार को इकनॉमिक टाइम्स की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘हमें सबसे ज्यादा इस बात को समझने की जरूरत है कि लंबे समय तक भारत इस हालात में नहीं रह सकता। ऐसा चलता रहा तो एक समय ऐसा आ जाएगा, जब कोरोना से ज्यादा मौतें भूख के चलते हो जाएंगी।’

उन्होंने कहा कि कोरोना के संक्रमण से भारत में मृत्यु की दर महज 0.25 से 0.5 फीसदी ही है। दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत में यह दर काफी कम है। भारत में कोरोना के संकट से निपटने के लिए 25 मार्च से 14 अप्रैल तक 21 दिनों का लॉकडाउन चला था। इसके बाद अब 3 मई तक के लिए देशव्यापी लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है। हालांकि भारत में कोरोना का संक्रमण बहुत तेजी से विस्तार नहीं कर पाया है। अब तक देश में 31,000 से ज्यादा कोरोना के मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा 1,008 लोगों की मौत हो चुकी है। देश में 30 जनवरी को पहला कोरोना का केस सामने आया था।

मूर्ति ने कहा कि भारत में तमाम कारणों के चलते 90 लाख लोगों की हर साल मौत हो जाती है। इनमें से एक चौथाई लोगों की मौत तो प्रदूषण से पैदा हुई बीमारियों के चलते हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘ जहां देश में प्राकृतिक तौर पर ही 90 लाख लोग हर साल मर जाते हैं, वहां बीते दो महीने 1,000 लोगों की मौत इतना बड़ा संकट नहीं है।’ उन्होंने कहा कि हम इसे जितना बड़ा संकट समझ रहे हैं, असल में यह उतना नहीं है और इसे लेकर पैनिक ज्यादा है। आईटी सेक्टर के दिग्गज ने कहा कि देश में 19 करोड़ अंसगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं। यदि यह संकट जारी रहा तो भविष्य में बड़ी आबादी के सामने आजीविका का संकट पैदा हो जाएगा।

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