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अडानी ग्रुप के हाथों में जाएगा मुंबई एयरपोर्ट, 74 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, केरल सरकार ने किया था निजीकरण का विरोध

मुंबई एयरपोर्ट के इस अधिग्रहण के साथ ही अडानी समूह के पास नए तैयर होने वाले नवी मुंबई एयरपोर्ट का भी ठेका चला जाएगा। इससे पहले बीते सप्ताह हुई कैबिनेट मीटिंग में जयपुर, त्रिवेंद्रम और गुवाहाटी एयरपोर्ट का ठेका अडानी समूह को दिए को मंजूरी दी गई थी।

Author Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: August 24, 2020 10:30 AM
gautam adaniअडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी

देश के दूसरे सबसे बड़े मुंबई एयरपोर्ट का संचालन दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी ग्रुप के हाथों में जा सकता है। अडानी समूह GVK ग्रुप के साथ विवाद के निपटारे के बाद 74% हिस्सेदारी खरीदने जा रहा है । अब तक GVK ग्रुप बहुसंख्यक हिस्सेदारी के साथ मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन कर रहा था। मुबंई इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सबसे व्यस्त और लाभप्रद एयरपोर्टों में से एक है। मुंबई एयरपोर्ट में हिस्सेदारी के बाद 6 एयरपोर्ट अडानी ग्रुप के अधीन आ जाएंगे। इसके बाद अडानी ग्रुप देश का दूसरा सबसे बड़ा प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर बन जाएगा। फिलहाल देश का सबसे बड़ा प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर जीएमआर ग्रुप है, जो दिल्ली और हैदराबाद एयरपोर्ट जैसे हवाई अड्डों का संचालन कर रहा है।

मुंबई एयरपोर्ट के इस अधिग्रहण के साथ ही अडानी समूह के पास नए तैयार होने वाले नवी मुंबई एयरपोर्ट का भी ठेका चला जाएगा। इससे पहले बीते सप्ताह हुई कैबिनेट मीटिंग में जयपुर, त्रिवेंद्रम और गुवाहाटी एयरपोर्ट का ठेका अडानी समूह को दिए को मंजूरी दी गई थी। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया था कि अडानी ग्रुप को एयरपोर्ट्स का संचालन दिए जाने से एयरपोर्ट अथॉरिटी को कुल 1,070 करोड़ रुपये की रकम मिलेगी। इन हवाई अड्डों के ऑपरेशन, मैनेजमेंट और डिवेलपमेंट की जिम्मेदारी अडानी समूह को 50 साल तक के लिए दी गई है। यही नहीं आने वाले दिनों में अहमदाबाद, लखनऊ और मंगलुरू एयरपोर्ट का संचालन भी अडानी समूह के हाथों में जा सकता है। ग्रुप ने बीते साल इन सभी 6 एयरपोर्ट्स के संचालन के ठेके के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई थी।

केरल सरकार ने अडानी समूह को एयरपोर्ट सौंपने का किया है विरोध: त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट का संचालन अडानी समूह को दिए जाने का केरल सरकार ने विरोध भी किया है। केरल के सीएम पिनराई विजयन ने पिछले दिनों पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि ऐसी स्थिति में राज्य सरकार सहयोग नहीं कर पाएगी। सीएम ने अपने पत्र में याद दिलाया था कि 7 साल पहले उड्डयन मंत्रालय ने आश्वासन दिया था कि जब किसी प्राइवेट कंपनी को शामिल किया जाएगा तो राज्य सरकार के योगदान का भी ध्यान रखा जाएगा।

मुफ्त में जमीन ट्रांसफर करने की दिलाई थी याद: केरल सरकार की ओर से कई बार केंद्र सरकार से यह मांग की गई थी कि त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट को स्पेशल पर्पज वीकल के तहत चलाया जाना चाहिए, जिसमें राज्य सरकार का बड़ा दखल होना चाहिए। सीएम विजयन ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा कि राज्य सरकार ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को हवाई अड्डा बनाने के लिए मुफ्त में ही 23.57 एकड़ जमीन ट्रांसफर की थी। ऐसे में स्पेशल पर्पज वीकल के तहत होने वाले मैनेजमेंट में राज्य सरकार को भी बड़ी हिस्सेदारी दी जानी चाहिए थी।

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