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COVID-19 ने रोकी बुलेट ट्रेन की रफ्तार, 1.08 लाख करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्‍ट को रोकना नहीं चाहती मोदी सरकार

Mumbai Ahmedabad bullet train updates: देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए 60 फीसदी जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। हालांकि इसके बाद भी मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ने वाली इस बुलेट रेल परियोजना के दिसंबर, 2023 की डेडलाइन तक पूरा होने में संशय है।

bullet projectबुलेट ट्रेन परियोजना की लगातार बढ़ रही है लागत

महाराष्ट्र सरकार की ओर से बेरुखी दिखाए जाने और कुछ आंदोलनो के बाद भी देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए 60 फीसदी जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। हालांकि इसके बाद भी मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ने वाली इस बुलेट रेल परियोजना के दिसंबर, 2023 की डेडलाइन तक पूरा होने में संशय है। इसकी एक बड़ी वजह कोरोना का यह संकट भी बना है। बुलेट परियोडना का काम देख रही कंपनी नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के एमडी अचल खरे ने कहा, ‘हम फास्ट ट्रैक पर हैं। हमने प्रोजेक्ट के लिए जरूरी 60 फीसदी भूमि का अधिग्रहण कर लिया है। गुजरात की बात करें तो वहां करीब 77 फीसदी जमीन मिल गई है।’

मोदी सरकार ने हाल ही में जापान इंटरनेशनल कॉपरेशन एजेंसी से 15,000 करोड़ रुपये के लोन का अग्रीमेंट साइन किया है। एजेंसी से कुल 88,000 करोड़ रुपये का सरकार लोन ले रही है। 1.08 लाख करोड़ रुपये की कुल लागत का इस तरह से जापान की ओर से 81 पर्सेंट हिस्सा लोन के तौर पर दिया जाएगा। हालांकि इस प्रोजेक्ट को लेकर महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे की राय बिलकुल उलट है। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘यदि हमें कहीं से बिना ब्याज का या फिर बेहद कम इंटरेस्ट पर लोन मिलता है तो इसका यह अर्थ नहीं है कि हम उसे लें और किसानों से जमीन छीन लें। यह एक सफेद हाथी की तरह है।’

जमीन अधिग्रहण को लेकर बुलेट ट्रेन परियोजना में लगातार नए अड़ंगे लगते दिख रहे हैं। महाराष्ट्र के पालघर और गुजरात के नवसारी जैसे इलाकों में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इसके अलावा एक और बड़ा संकट यह है कि इस प्रोजेक्ट की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। जापानी करेंसी येन के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट के चलते लागत में इजाफा हो रहा है। इसके अलावा महाराष्ट्र के किसान जमीन के लिए अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

508.17 किलोमीटर लंबा यह बुलेट नेटवर्क गुजरात के 8 जिलों वलसाड, नवसारी, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, खेड़ा और अहमदाबाद से होकर गुजरेगा। इसके अलावा महाराष्ट्र के तीन जिलों मुंबई, ठाणे और पालघर से यह निकलेगा। हालांकि महाराष्ट्र सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर असहमत दिख रही है। पिछले साल ही कंपनी ने 9 सिविल वर्क टेंडर्स निकालते थे, जिनके जुलाई या अगस्त तक खुलने की बात थी। ये सिविल वर्क कॉन्ट्रैक्ट स्टेशनों, पुलों, मेंटनेंस डिपो और टनल आदि के निर्माण के लिए हैं। इसके अलावा जापनी कंपनियों को इलेक्ट्रिकल, रोलिंग स्टॉक्स, सिग्नलिंग और ट्रैक्स आदि का काम सौंपा जाना है।

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