Gold Investment Through Multi Asset Allocation Funds : सोने की चाल ने पिछले कुछ अरसे में बहुत से निवेशकों को उलझन में डाल दिया है। जो लोग एक-दो साल पहले निवेश कर चुके हैं, उन्हें तो भारी फायदा दिखा होगा। लेकिन जिन लोगों ने अब तक सोने में निवेश नहीं किया या उसे बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए कीमतों का मौजूदा स्तर और उसमें शॉर्ट टर्म में होने वाले उतार-चढ़ाव परेशान करने वाले हो सकते हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों को आमतौर पर सोने में एक बार में पैसे लगाने की जगह थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करने को कहा जाता है। लेकिन इसका सही तरीका क्या हो सकता है?
ऐसे भी कर सकते हैं सोने में निवेश
सोने में लंबी अवधि के लिए अनुशासित ढंग से पैसे लगाने हों, तो सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिये गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेश करना एक बेहतर तरीका माना जाता है। लेकिन गोल्ड फंड या गोल्ड ईटीएफ के रिटर्न भी फिजिकल गोल्ड की कीमतों से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। इसलिए सोने में तेज उतार-चढ़ाव के दौर में निवेशक कई बार गोल्ड फंड में निवेश को लेकर भी असमंजस में पड़ जाते हैं।
जो निवेशक सोने में ज्यादा संतुलित और डायवर्सिफाइड ढंग से निवेश करना पसंद करते हैं, उनके लिए मल्टी एसेट एलोकेशन फंड में एसआईपी के जरिये निवेश करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है। मल्टी एसेट एलोकेशन फंड को हाइब्रिड फंड्स की कैटेगरी में रखा जाता है। इन फंड्स के पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट के अलावा सोने और चांदी को भी तय अनुपात में शामिल किया जाता है। सेबी के नियमों के तहत मल्टी एसेट एलोकेशन फंड के लिए कम से कम 3 एसेट क्लास में निवेश करना जरूरी है और इनमें से हर एक एसेट क्लास में कम से कम 10% निवेश अनिवार्य है। इससे निवेशकों को एक ही स्कीम के जरिये अलग-अलग एसेट क्लास में संतुलित ढंग से पैसे लगाने का मौका मिलता है।
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मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स का पिछला प्रदर्शन
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के पोर्टल पर देश के 33 मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स के पिछले प्रदर्शन और एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के आंकड़े उपलब्ध हैं। इनमें 26 फंड्स के पिछले 1 साल के रिटर्न के आंकड़े मौजूद हैं, जबकि 8 फंड्स को 5 साल या उससे ज्यादा समय हो चुका है।
टॉप 3 मल्टी एसेट एलोकेशन फंड का परफॉर्मेंस
यहां जिन 3 सबसे ज्यादा एयूएम वाले मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स के आंकड़े दिए हैं, उनमें आप देख सकते हैं कि AUM के लिहाज से देश के 3 सबसे बड़े मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स के डायरेक्ट प्लान ने पिछले 5 साल में करीब 16 से 21 फीसदी की दर से सालाना रिटर्न दिए हैं। इन सभी को रिस्कोमीटर पर बहुत अधिक जोखिम (Very High Risk) की रेटिंग दी गई है।
1. आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल मल्टी एसेट फंड (ICICI Prudential Multi Asset Fund)
4 फरवरी 2026 को AUM : 81, 777.05 करोड़ रुपये
5 साल का औसत सालाना रिटर्न (CAGR): 21.31 % (डायरेक्ट प्लान), 20.48 % (रेगुलर प्लान)
बेंचमार्क इंडेक्स : Nifty 200 TRI (65%) + Nifty Composite Debt Index (25%) + Domestic Price of Gold (6%) + Domestic Price of Silver (1%) + iCOMDEX Composite Index (3%)
एक्सपेंस रेशियो : 0.64 % (डायरेक्ट प्लान), 1.31 % (रेगुलर प्लान)
2. एसबीआई मल्टी एसेट एलोकेशन फंड (SBI Multi Asset Allocation Fund)
4 फरवरी 2026 को AUM : 15, 145.59 करोड़ रुपये
5 साल का औसत सालाना रिटर्न (CAGR): 16.16 % (डायरेक्ट प्लान), 15.13 % (रेगुलर प्लान)
बेंचमार्क इंडेक्स : 45% BSE 500 TRI + 40% Crisil Composite Bond Fund Index + 10% Domestic Price of Gold + 5% Domestic Price of Silver
एक्सपेंस रेशियो : 0.58 % (डायरेक्ट प्लान), 1.38 % (रेगुलर प्लान)
3. निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड (Nippon India Multi Asset Allocation Fund)
4 फरवरी 2026 को AUM : 12, 648.86 करोड़ रुपये
5 साल का औसत सालाना रिटर्न (CAGR): 18.37 % (डायरेक्ट प्लान), 16.82 % (रेगुलर प्लान)
बेंचमार्क इंडेक्स : 50% BSE 500 TRI + 20% of MSCI Wolrd World Index + 15% of Crisil Short Term Bond Index & 15% of Domestic Price of Gold
एक्सपेंस रेशियो : 0.26 % (डायरेक्ट प्लान), 1.36 % (रेगुलर प्लान)
(सोर्स : AMFI)
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निवेश से पहले रिस्क फैक्टर समझें
ऊपर जिन स्कीम के आंकड़े दिए हैं, उनके अलावा जिन 5 और मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स के पिछले 5 साल के आंकड़े AMFI के पोर्टल पर मौजूद हैं, उन सभी के डायरेक्ट प्लान ने 5 साल में 13 फीसदी से ज्यादा सालाना रिटर्न दिया है। लेकिन इन आंकड़ों के आधार पर निवेश से जुड़ा कोई फैसला करने से पहले यह बात जरूर ध्यान में रखनी चाहिए कि म्यूचुअल फंड्स के पिछले रिटर्न के आगे भी जारी रहने की कोई गारंटी नहीं होती। साथ ही बाजार आधारित रिटर्न होने की वजह से ज्यादातर मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स का रिस्क लेवल अधिक (High) या बहुत अधिक (Very High) है। इसलिए निवेश के बारे में कोई भी फैसला करने से पहले अपनी रिस्क लेने की क्षमता को जरूर ध्यान में रखें।
(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना है, किसी स्कीम में निवेश की सलाह देना नहीं। निवेश का कोई भी फैसला पूरी जानकारी हासिल करने के बाद और सेबी से मान्यताप्राप्त इनवेस्टमेंट एडवाइजर की सलाह लेकर ही करें।)
