ग्रीन एनर्जी पर मुकेश अंबानी का प्‍लान, कहा, दश‍क में एक डॉलर होगी ग्रीन हाइड्रोजन कॉस्‍ट

अंबानी ने कहा कि भारत में एक नई हरित क्रांति शुरू हो चुकी है। उन्‍होंने कहा कि पुरानी हरित क्रांति ने भारत को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया था। नई हरित क्रांति भारत को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।

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मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को इंटरनेशनल क्लाइमेट समिट 2021 को संबोधि‍त किया। (Photo Indian Express)

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने उम्‍मीद लगाई है कि एक दशक में ग्रीन हाइड्रोजन की लागत कम होकर 1 डॉलर प्रति किलोग्राम हो जाएगी। इंटरनेशनल क्लाइमेट समिट 2021 में बोलते हुए अंबानी ने कहा कि शुरुआत में इसकी लागत को 2 डॉलर प्रति किलोग्राम से कम करके ग्रीन हाइड्रोजन को सबसे किफायती फ्यूल ऑप्‍शन बनाने के प्रयास चल रहे हैं। मैं आप सभी को विश्वास दिलाता हूं कि रिलायंस इस दशक के अंत से पहले आक्रामक रूप से इस टारगेट को हासि‍ल करेगी।

उन्‍होंने कहा‍ कि मुझे यकीन है कि भारत एक दशक के अंदर ग्रीन हाइड्रॉजन के टारगेट को 1 डॉलर प्रति किलोग्राम से कम कर सकता है। जिसके बाद भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा। अंबानी ने कहा कि भारत में एक नई हरित क्रांति शुरू हो चुकी है। उन्‍होंने कहा कि पुरानी हरित क्रांति ने भारत को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया था। नई हरित क्रांति भारत को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।

उन्‍होंने जानकारी देते हुए कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 75,000 करोड़ रुपए के इंवेस्‍टमेंट से जामनगर में ग्रीन एनर्जी कॉम्पलेक्स पर काम शुरू कर दिया है। उन्‍होंने इस बात का भी दावा किया कि रिलायंस 2035 तक नेट जीरो कार्बन कंपनी होगी। मुकेश अंबानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह दोहरी रणनीति है। इसमें एक तरफ भारत की कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम होगी। अंबानी के अनुसार पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 100 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का मुकाम हासिल कर लिया है। अब हम 2022 तक 175 गीगावाट के लक्ष्य की तरफ मजबूती से बढ़ रहे हैं।

मुकेश अंबानी ने आगे कहा कि क्‍लीन एनर्जी की जरुरत पूरी दुनिया की अनिवार्य बन गया है। यह भारत के लिए एक और कारण से भी महत्वपूर्ण है। उन्‍होंने उस कारण के बारे में बताते हुए कहा कि देश में फ्यूल की जितनी डिमांड है उसका अध‍िकतर भाग हम इंपोर्ट करते हैं। जिसके लिए देश को हर साल 160 अरब डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। हालांकि भारत की प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत और उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधे से भी कम है, हम ग्रीनहाउस गैसों के दुनिया के तीसरे सबसे बड़े उत्सर्जक हैं।

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