भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को गति देने के लिए मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा ने गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता वाला डेटा सेंटर विकसित करने की साझेदारी की है।
अगले दो वर्षों में तैयार होने वाला यह डेटा सेंटर भारत में मेटा का पहला ‘बिल्ट-टू-सूट’ केंद्र होगा और कंपनी की बढ़ती एआई व डिजिटल सेवाओं की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।
बुधवार को जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, ‘ रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड 168 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करेगी, जिसे दो वर्ष में पूरा किया जाएगा। इसे आगे बढ़ाने का विकल्प भी होगा। मेटा इस सुविधा से क्षमता पट्टे (लीज) पर लेगी।’
यह डेटा सेंटर रिन्यूएबल एनर्जी से संचालित होगा और समुद्री जल के लवण हटाकर (डिसैलिनेशन) इसका शीतलन किया जाएगा। बयान में कहा गया कि मेटा प्लेटफॉर्म्स भारत में दो प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा प्रदाताओं क्लीनमैक्स और फोर्थ पार्टनर एनर्जी के साथ भी साझेदारी कर रही है। इससे करीब एक गीगावाट (1000 मेगावाट) रिन्यूएबल एनर्जी को समर्थन मिलेगा।
समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा, ‘ मेटा के साथ यह साझेदारी भारत के डिजिटल अवसंरचना क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण है। मेटा जैसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी के लिए भारत का पहला ‘बिल्ट-टू-सूट’ डेटा सेंटर बनाना इस बात का प्रमाण है कि भारत वैश्विक एआई क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।’
उन्होंने कहा, ‘ जामनगर हाइपरस्केल एआई कंप्यूटिंग का एक प्रमुख केंद्र बनेगा और इस दृष्टि को साकार करने के लिए मेटा के साथ साझेदारी पर हमें गर्व है।’
मेटा ने 2020 में जियो प्लेटफॉर्म्स में 5.7 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया था। बयान में कहा गया है कि यह डेटा सेंटर मेटा के वैश्विक अवसंरचना की जरूरतों को पूरा करेगा और उसके मुख्य कारोबार एवं एआई कंप्यूटिंग आवश्यकताओं का समर्थन करेगा, जो वैश्विक डिजिटल तथा एआई परिवेश में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
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रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने लगातार छठे साल कंपनी से कोई वेतन नहीं लिया है। कंपनी की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 से वित्तीय वर्ष 2025-26 तक उन्होंने रिलायंस से सैलरी, भत्ता, कमीशन कुछ नहीं लिया।
रिलायंस के मुताबिक, अंबानी ने जून 2020 में कोविड महामारी के दौरान देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए अपना पूरा वेतन छोड़ने का फैसला किया था। कंपनी ने कहा कि उन्होंने यह फैसला पूरी तरह स्वेच्छा से लिया था और उसके बाद भी इसे लगातार जारी रखा। यहां पढ़ें पूरी खबर…
