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कारोबार के विस्तार में जुटी डाबर, इस काम के लिए मिलाया मुकेश अंबानी की कंपनी से हाथ

डाबर इंडिया की पीथमपुर स्थित इकाई शुरुआती दौर में 1,250 लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार देगी, जबकि इसके पूरी तरह शुरू होने के बाद लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिलेगा।

कारोबार के विस्तार में जुटी डाबर, इस काम के लिए मिलाया मुकेश अंबानी की कंपनी से हाथ
रिलायंस रिटेल से डाबर ने मिलाया हाथ

आयुर्वेद की दुनिया में पतंजलि और बैजनाथ जैसी कंपनियों की प्रतिद्वंदी डाबर इंडिया ने अहम कदम उठाया है।

550 करोड़ का निवेश: डाबर इंडिया ने अपना विस्तार करते हुए मध्य प्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में 550 करोड़ रुपये के चरणबद्ध निवेश वाले कारखाने की नींव रखी है। 51 एकड़ पर बनने वाली यह इकाई कोविड-19 की दूसरी लहर का प्रकोप घटने के बाद सूबे में शुरू होने वाली बड़ी निवेश परियोजनाओं में से एक है। डाबर इंडिया इस संयंत्र में आयुर्वेदिक दवाएं, पोषक उत्पाद और खाद्य उत्पाद बनाएगी।

कितने लोगों को मिलेगा रोजगार: डाबर इंडिया की पीथमपुर स्थित इकाई शुरुआती दौर में 1,250 लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार देगी, जबकि इसके पूरी तरह शुरू होने के बाद लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। डाबर ने कहा कि इस नई फैक्ट्री का निर्माण मध्य प्रदेश सरकार की मेगा प्रोजेक्ट स्कीम के साथ साथ केन्द्र सरकार की उत्पादन से जुड़ी सहायता योजना (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेन्टिव या पीएलआई) योजना के तहत किया गया है। इस फैक्ट्री के पहले चरण का निर्माण वित्तवर्ष 2021-22 के अंत तक पूरा होने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

डाबर ने रिलायंस से मिलाया हाथ: इस बीच, डाबर इंडिया लिमिटेड ने अपने टूथपेस्ट ब्रांड डाबर रेड पेस्ट से कागज के कार्टन हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हाल ही में डाबर ने रिलायंस रिटेल के साथ मिलकर पेपर कार्टन की जगह डाबर रेड टूथपेस्ट की पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग करेगी। कंपनी की यह पहल उसके टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कार्य को अंजाम देने का हिस्सा है।

कंपनी ने डाबर रेड पेस्ट से कागज के डिब्बों को हटाने के लिए एक पायलट पहल शुरू की है। रिलायंस रिटेल के साथ एक संयुक्त पहल में प्रमुख आधुनिक व्यापार आउटलेट में एक नई पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग शुरू की जा रही है। बाहरी कार्टन हटाने से बचने वाले कागज का उपयोग नोटबुक बनाने में किया जाएगा और चाइल्ड राइट्स एंड यू (सीआरवाई) के द्वारा यह कॉपियां जरूरतमंद बच्चों को मिलेंगी।

डाबर की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक कंपनी पेपर कार्टन हटाने के बाद जो भी कागज बचेगा, उसका उपयोग नोटबुक बनाने में करेगी, जो 1 लाख 20 हजार से ज्यादा जरूरतमंद बच्चों को बांटी जाएंगी। हमें उम्मीद है कि इस प्रयास के तहत हम सालभर में 150 टन कागज बचाने में सफल होंगे और पर्यावरण से कचरा दूर रख पाएंगे। इसके अलावा, डाबर इंडिया एक आउटर पेपर कार्टन-फ्री लो यूनिट प्राइस पैक पेश कर रहा है, जो विशेष रूप से ग्रामीण बाजारों के लिए बनाया गया है।

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