Amazon ने बढ़ाई मुकेश अंबानी के रिलायंस की मुश्किलें, यहां ​टाटा को मिलेगा फायदा!

हाल ही में रिलायंस रिटेल ने किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप के थोक व खुदरा कारोबार को खरीदने का सौदा पूरने की समय-सीमा छह महीने के लिये बढ़ा दी है।

mukesh ambani, ratan tata, tata newsमुकेश अंबानी, रतन टाटा (Photo-PTI )

Reliance Retail and Future Retail Deal: बीते साल रिटेल मार्केट में छा जाने के लिए मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कई अहम डील की।

इस दौरान रिलायंस रिटेल में कई विदेशी कंपनियों ने निवेश किया। वहीं, रिलायंस ने फ्यूचर ग्रुप के रिटेल कारोबार के अधिग्रहण के लिए भी 24 हजार करोड़ की डील की। हालांकि, ई कॉमर्स कंपनी अमेजन की आपत्ति की वजह से फ्यूचर ग्रुप की डील अधर में पड़ गई है। इस डील के भविष्य को लेकर संशय बरकरार है। वहीं, इन सबका फायदा टाटा ग्रुप को मिलने की उम्मीद की जा रही है। आइए समझते हैं कैसे…

दरअसल, हाल ही में रिलायंस रिटेल ने किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप के थोक व खुदरा कारोबार को खरीदने का सौदा पूरने की समय-सीमा छह महीने के लिये बढ़ा दी है। सौदा पूरा करने की समयावधि 31 मार्च, 2021 थी, जो अब बढ़कर 30 सितंबर, 2021 कर दी गई है। आपको यहां बता दें कि फ्यूचर ग्रुप और रिलायंस की इस डील को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अलावा शेयर बाजारों से मंजूरियां मिल चुकी हैं। लेकिन कोर्ट में अमेजन की अपील की वजह से डील में देरी हुई है।

ऐसा माना जा रहा है कि रिलायंस और फ्यूचर डील के पूरा होने से पहले ही टाटा ग्रुप अपने बहुप्रतीक्षित प्लेटफॉर्म सुपर ऐप को लॉन्च कर सकती है। आपको यहां बता दें कि टाटा समूह अपने विभिन्न कंज्यूमर बिजनेसेज को एक साथ लाते हुए सुपर ऐप के नाम से एक ओम्नीचैनल डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की योजना बना रहा है। टाटा के इस कदम से मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की चुनौती बढ़ेगी।

रिलायंस ने गैस की बिक्री के लिए बोलियां मांगी: इस बीच, मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी भागीदार ब्रिटेन की बीपी पीएलसी ने गैस की बिक्री के लिए बोलियां मांगी हैं। जानकारी के मुताबिक पूर्वी अपतटीय केजी-डी6 ब्लॉक से उपलब्ध 55 लाख मानक घनमीटर प्रतिदिन की अतिरिक्त गैस की बिक्री होनी है।

इसकी ई-नीलामी 23 अप्रैल को होगी। इस गैस की आपूर्ति अप्रैल के आखिर या मई के शुरुआती दिनों में शुरू हो जाएगी। बोली लगाने वाली कंपनियां तीन से पांच साल की आपूर्ति अवधि का चयन कर सकती हैं।

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