मुकेश अंबानी अपनी संपत्ति के बंटवारे पर कर रहे हैं विचार, नहीं चाहते कि भविष्य में बच्चों में हो कोई विवाद

1992 में कंपनी के फाउंडर सैम वॉल्टन की मौत के बाद कारोबार जिस तरह से बांटा गया, वह तरीका मुकेश को खासा पसंद आ रहा है। वॉल्टन परिवार ने 1988 से ही कंपनी के कारोबार को अपने मैनेजरों के हाथ सौंप दिया था।

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मुकेश अंबानी और उनके परिवार के भविष्य में लंदन में रहने की खबर सामने आने पर सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

21वीं सदी की शुरुआत में भारत के कारोबार जगह की सबसे बड़ी खबर रिलायंस का संपत्ति विवाद रहा था। 2002 में रिलायंस के सर्वेसर्वा धीरूभाई अंबानी का देहांत हुआ तो उसके बाद मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया था। सालों चले पारिवारिक विवाद ने देश विदेश की मीडिया में सुर्खियां बंटोरीं। आखिरकार मां आनंदीबेन ने दखल देकर दोनों भाइयों के बीच एक लक्ष्मण रेखा खींचकर तमाम संपदा का बंटवारा कर दिया। बांबे हाईकोर्ट ने उस बंटवारे पर मुहर लगाई तो परिवार में चल रहे शक्ति परीक्षण का संघर्ष थम गया। मुकेश अंबानी को वो जख्म अभी तक याद है और माना जा रहा है कि इसी वजह से वो रिलायंस इंडस्ट्रीज के बंटवारे पर काम करने लग गए हैं।

NDTV की खबर के मुताबिक कयास हैं कि मुकेश अपनी संपत्ति एक ट्रस्ट को ट्रांसफर करेंगे। इसके पास रिलायंस इंडस्ट्रीज का मालिकाना हक होगा। ट्रस्ट में मुकेश अंबानी, पत्नी नीता अंबानी, तीनों बच्चों आकाश, अनंत और ईशा का हिस्सा होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश उन मॉडलों पर विचार कर रहे हैं, जिनको दुनिया के दूसरे रईसों ने अपनी संपत्ति के बंटवारे के लिए तैयार किया था। मुकेश अंबानी का एम्पायर 208 बिलियन डॉलर के करीब है। वो नहीं चाहते हैं कि इतनी बड़ी दौलत के बंटवारे को लेकर उनके तीन बच्चों के बीच किसी तरह का विवाद हो। रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश को वॉलमार्ट इंक के वॉल्टन फैमिली का तरीका पसंद आया है।

1992 में कंपनी के फाउंडर सैम वॉल्टन की मौत के बाद कारोबार जिस तरह से बांटा गया, वह तरीका मुकेश को खासा पसंद आ रहा है। वॉल्टन परिवार ने 1988 से ही कंपनी के कारोबार को अपने मैनेजरों के हाथ सौंप दिया था। इस तमाम कामकाज पर नजर रखने के लिए एक बोर्ड बनाया था। सैम के सबसे बड़े बेटे रॉब वॉल्टन और उनके भतीजे स्टूअर्ट वॉलमार्ट के बोर्ड में शामिल थे। सैम ने अपनी मौत से 40 साल पहले 1953 में ही उत्तराधिकार योजना पर काम करना शुरू कर दिया था। सैम वॉल्टन ने अपने चार बच्चों में 20-20 फीसदी की दौलत बांट दी थी। इससे टैक्स का बोझ भी कम हुआ और बिजनेस पर फैमिली का कब्जा भी बना रहा। वॉलमार्ट में 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा अभी भी परिवार वालों के पास है।

हाल के दिनों में देखा जाए तो मुकेश अंबानी के बच्चे कारोबार को लेकर ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं। शेयरहोल्डर्स की एक मीटिंग में अंबानी ने संकेत दिया था कि उनके बाद आकाश, ईशा और अनंत रिलायंस में अहम भूमिका निभाएंगे। माना जा रहा है कि मुकेश अपनी दौलत को एक ट्रस्ट को ट्रांसफर करेंगे। इस ट्रस्ट के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज का मालिकाना हक होगा। इस ट्रस्ट में मुकेश अंबानी, पत्नी नीता अंबानी, तीनों बच्चों आकाश, अनंत और ईशा का स्टेक होगा। अंबानी के पसंदीदा लोगों को ट्रस्ट का एडवाइजर नियुक्त किया जाएगा। मुकेश की पत्नी नीता अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के बोर्ड में हैं। उनकी बेटी ईशा ने येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। जबकि बेटे अनंत और आकाश ब्राउन यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट हैं। माना जा रहा है कि सलाहकार के तौर पर अंबानी परिवार बोर्ड की कमान उन लोगों को देगा जिन पर आंख मूंदकर भरोसा किया जा सके।

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