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कभी गुब्बारे बनाती थी, आज है सुखोई के टायर बनाने वाली इकलौती भारतीय कंपनी और एक शेयर 50 हजार रुपए का, जानिए MRF की कहानी

साल 2001 में एमआरएफ के एक शेयर का मूल्य 500 रुपया था। यानी पिछले 15 सालों में इसके शेयर मूल्य में 100 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

VLCC, HDFC, Da Milano & Hi Design, Ferns n Petals, monte carlo, himalaya, CCD, Royal enfield, britania, indian brands gallery, Larsen & Toubro, MRF, Da Milano & Hi DesignMRF का पूरा नाम मद्रास रबर कंपनी है। कंपनी दुनिया के करीब 65 देशों को अपने उत्पाद एक्सपोर्ट करती है।

मद्रास रबर फैक्ट्री (एमआरएफ) से आम भारतीयों के ज़हन में या तो गाड़ियों के टायर की छवि उभरती है या फिर सचिन तेंदुलकर के बल्ले की। लेकिन बहुत कम लोगों का ध्यान इस बात पर गया कि एमआरएफ 28 सितंबर को इतिहास रचते हुए देश के सबसे मूल्यवान शेयर स्टॉक वाली कंपनी बन गई। इससे पहले ओडिशा मिनरल डेवलपमेंट कंपनी के शेयर देश में सबसे महंगे थे। 28 सितंबर को एआरएफ के एक शेयर का बाजार मूल्य 50,000 रुपये के पार चला गया। साल 2001 में कंपनी के एक शेयर का मूल्य 500 रुपया था। बुधवार (17 सितंबर) को भी कंपनी का शेयर भाव 50 हजार रुपये से ऊपर रहा।  31 सिंतबर को कंपनी का शेयर मूल्य 53,000 रुपये तक पहुंच गया था। ऑटोमोबाइल सेक्टर में मांग बढ़ने के नतीजतन टायर की मांग भी बढ़ेगी इसलिए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि कंपनी के शेयर अभी और ऊपर जा  सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सफलता की नई ऊंचाइयां छू रही कंपनी की शुरुआत एक गुब्बारा बनानी वाली कंपनी के तौर पर हुई थी?

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एमआरएफ की नींव एक गुब्बारे बनानी वाली कंपनी के तौर पर केएम मैमन मापिल्लई ने आजादी से पहले 1946 में केरल में रखी थी। केएम के पिता भी एक सफल कारोबारी थे लेकिन उन्होंने बहुत ही कठिन हालात में कंपनी शुरू की थी। त्रावणकोर के राजा ने आजादी की लड़ाई में शामिल होने की वजह से उनके पिता केसी मैमन मापिल्लई की सारी संपत्ति जब्त कर ली थी। नतीजतन उनका कारोबार ठप्प पड़ गया। शुरुआत में केएम एक झोले में गुब्बारे रखकर उन्हें खुद ही दुकानदारों को बेचते थे। उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने 1954 में ट्रेड रबर उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद एमआरएफ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल दर साल वो सफलता की नई इबारत लिखता गया। एमआरएफ 1961 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई। 1962 में इसने टायर बनाना शुरू किया। 1964 में एमआरएफ टायर का अमेरिका को निर्यात शुरू किया और 1973 में देश का पहला रेडियल टायर पेश किया।

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साल 2007 में कंपनी का कारोबार एक अरब डॉलर पहुंच गया। अगले चाल सालों में इसके कारोबार में चार गुना बढ़ोतरी हुई। साल 2015-16 में कंपनी ने कारोबार 20,243.94 करोड़ रुपये का कारोबार किया। कंपनी अाज ट्यूब, बेल्ट, ट्रेड, हवाईजहाज तक के टायर बनाती है। एमआरएफ भारत की एकमात्र टायर निर्माता कंपनी है जो सुखोई 30 एमकेआई सिरीज के लड़ाकू विमानों के लिए टायर बनाती है। कंपनी दुनिया के करीब 65 देशों में अपने उत्पाद निर्यात करती है।

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विशेषज्ञों के अनुसार कंपनी की सफलता में उसके रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) और राष्ट्रवादी थीम वाले प्रचार अभियान की प्रमुख हाथ मानते हैं। कंपनी बदलती जरूरतों के अनुसार अपने उत्पाद में बदलाव करती रही है। साथ ही देशभक्ति की भावना से जोड़कर प्रचार करने से इसके संग लोगों का भावनात्मक जुड़ाव हो सका। हालांकि कंपनी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। दूसरे  घरेलू टायर उत्पादकों के साथ ही सस्ते चीनी रबड़ उत्पादों से कंपनी को भविष्य में कड़ी टक्कर मिलेगी।

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17 अक्टूबर दोपहर तक एमआरएफ का शेयर भाव। 17 अक्टूबर दोपहर तक एमआरएफ का शेयर भाव।

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