13 साल का हुआ बिटकॉइन, छह पैसे से तय किया 48.2 लाख का सफर

बिटकॉइन को औपचारिक तौर पर लांच हुए 13 साल हो गए हैं। आज इसकी कीमत 48 लाख को पार कर चुकी है। इसके फाउंडर की पहचान भी अब तक रहस्य ही है।

Bitcoin Founder Satoshi Nakamoto
बिटकॉइन के फाउंडर की पहचान अभी भी रहस्य है। (Source: Twitter/@BitcoinMagazine)

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को नए जमाने की हकीकत बनाने वाले बिटकॉइन (Bitcoin) के अब 13 साल पूरे हो चुके हैं। इस 13 साल में बिटकॉइन ने ऐसा सफर तय किया है, जिसके ऊपर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। महज छह पैसे के भाव से शुरू हुआ यह सफर अभी 48.2 लाख के शिखर पर जा पहुंचा है।

13 साल पहले प्रकाशित हुआ था पहला Bitcoin White Paper

आज से 13 साल पहले 31 अक्टूबर 2008 को बिटकॉइन की औपचारिक शुरुआत हुई थी। उस रोज पहली बार बिटकॉइन का व्हाइट पेपर पब्लिश (Bitcoin White Paper) हुआ था। इसे सातोशी नाकामोतो (Satoshi Nakamoto) के नकली नाम से ऑनलाइन पब्लिश किया गया था। ‘बिटकॉइन: अ पीअर-टू-पीअर इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम’ शीर्षक से प्रकाशित व्हाइट पेपर में बताया गया था कि कैसे बिना किसी सरकारी के नियंत्रण वाली भविष्य की ऑनलाइन पेमेंट प्रणाली से लोगों को फायदा हो सकता है।

Most Valuable Cryptocurrency है बिटकॉइन

आज के समय में बिटकॉइन सबसे अधिक वैल्यू वाली क्रिप्टोकरेंसी (Most Valuable Cryptocurrency) है। जब इसकी औपचारिक शुरुआत हुई थी, तब इसके एक यूनिट का भाव महज 0.0008 डॉलर (करीब छह पैसे) था। आज भारत में बिटकॉइन 64,400 डॉलर (करीब 48.2 लाख रुपये) के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। इस तरह बिटकॉइन ने 13 साल की अब तक की अपनी यात्रा में छह पैसे से 48.2 लाख का अविश्वसनीय मुकाम हासिल किया है।

लिमिटेड है Bitcoin Mining

बिटकॉइन की वैल्यू में इस अविश्वसनीय वृद्धि के पीछे एक अहम कारण इससे जुड़ी बुनियादी शर्त है। नाकामोतो ने इसकी औपचारिक शुरुआत के समय ही यह तय कर दिया था कि बिटकॉइन के यूनिट की संख्या कभी भी 2.10 करोड़ से अधिक नहीं हो सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2021 तक मार्केट में 1.87 करोड़ बिटकॉइन यूनिट उपलब्ध थे। इस तरह अब बिटकॉइन के सिर्फ 23 लाख यूनिट की माइनिंग (Bitcoin Mining) की जा सकती है। सप्लाई सीमित होने और मांग बेतहाशा होने से बिटकॉइन के यूनिट का भाव तेजी से चढ़ा है।

कोई नहीं जानता बिटकॉइन के डेवलपर का नाम

बिटकॉइन के साथ एक रोचक बात इसे डेवलप करने वाले की गोपनीयता है। आज तक कोई नहीं जानता कि बिटकॉइन के डेवलपर सातोशी नाकामोतो की असल पहचान क्या है। नाकामोतो ने पेमेंट के तरीके में क्रांति लाने वाला प्रोडक्ट डेवलप करने के महज तीन साल बाद क्रिप्टो मार्केट को छोड़ दिया। बताया जाता है कि नाकामोतो 2011 में क्रिप्टो मार्केट से बाहर निकल गए।

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बिटकॉइन के इंवेंटर के वॉलेट में पड़ी है करीब पांच लाख करोड़ रकम

सातोशी नाकामोतो के वॉलेट (Satoshi Nakamoto Wallet) में अभी 66 बिलियन डॉलर यानी करीब 4.97 लाख करोड़ रुपये के बिटकॉइन टोकन मौजूद हैं। 2011 के बाद भी नाकामोतो के वॉलेट का वजन बढ़ता गया है। मजेदार है कि नाकामोतो ने इनमें से कुछ भी खर्च नहीं किया है और सारे टोकन बिना इस्तेमाल के पड़े हुए हैं।

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