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18 हजार करोड़ का मामला, दर्जन भर से ज्यादा बैंकों ने सरकार को अदालत में घसीटा

सरकार का आरोप है कि बैंकों ने मंथली एवरेज बैलेंस (एमएबी) सेवाओं से जुड़े सर्विस टैक्स के भुगतान को नजरअंदाज किया है।

Author नई दिल्ली | Updated: July 22, 2019 2:48 PM
प्रतीकात्मक चित्र फोटो सोर्स- जनसत्ता

दर्जन भर से ज्यादा बैंकों ने सरकार को अदालत में घसीटा है। मामला 18 हजार करोड़ रुपए के भुगतान से जुड़ा है। सरकार ने आरोप लगाया है कि दर्जन भर से ज्यादा बैंकों ने 18000 करोड़ रुपए के सर्विस टैक्स (जीएसटी) का भुगतान नहीं किया है। सरकार ने यह भी आरोप लगया है कि इन बैकों ने टैक्स के नियमों का उल्लंघन किया है। सरकार का आरोप है कि बैंकों ने मंथली एवरेज बैलेंस (एमएबी) सेवाओं से जुड़े सर्विस टैक्स के भुगतान को नजरअंदाज किया है।

सरकार ग्राहकों को दी जाने वाली धन प्रबंधन या लॉकर जैसी विभिन्न सेवाओं पर जीएसटी और अन्य सेवा शुल्क लगाना चाहती है। सरकार ने कहा कि इस फैसले का असर उच्च मूल्य वाले ग्राहकों पर पड़ेगा न कि जनधन खातों से जुड़े ग्राहकों पर। बैंकों ने इसी का विरोध करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।

‘ईटी’ की खबर के मुताबिक सरकार की तरफ से बैंकों को बीते साल अप्रैल महीने में नोटिस भी जारी किया गया था लेकिन बैंकों ने इस नोटिस का सरकार को कोई जवाब नहीं दिया। कोर्ट में पहुंचने से पहले बैंकों ने इस मुद्दे को अलग-अलग फोरम में उठाया। सरकार का मानना है कि बैंक डिपोजिट आधारित सेवाओं के जरिए बैंकों ने टैक्स का भुगतान नहीं किया है। इन बैंकों में देश-विदेश के नामी बैंक शामिल हैं। सरकार ने 2015 में ‘सूत्रों पर आधारित’ जानकारियों के मिलने के बाद जांच शुरू

की थी।

 

किस बैंक को कितना भुगतान करना है? 

एचडीएफसी बैंक को 6,200 करोड़ रुपए, आईसीआईसीआई को 3,500 करोड़ रुपए, एक्सिस बैंक को 3,300 करोड़ रुपए, कोटक/आईएनजी वीवाईएसवाईए को 1,000 करोड़ रुपए और एसबीआई को 970 करोड़ रुएप वहीं पंजाब नेशनल बैंक को 900 करोड़ रुएप। इनके अलावा सिटीबैंक को 650 करोड़ रुएप, स्टैनडर्ड चॉर्टड 350 करोड़ रुपए, येस बैंक 260 करोड़ रुपए। बैंक ऑफ बड़ौदा 260 करोड़ रुपए, एचएसबीसी 130 करोड़ रुपए। डॉयचे 35 करोड़ रुपए और कॉर्पोरेशन बैंक को 3 करोड़ रुपए का भुगतान करना है।

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