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NPA से जूझ रहे सरकारी बैंकों को मोदी सरकार की सौगात! 83,000 करोड़ रुपए देने का एलान

सरकारी बैंक NPA से जूझ रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि एनपीए की पहचान लगभग पूरी हो चुकी है, गैर पहचान वाले अब 0.59% हैं जो मार्च 2015 में 0.7% तक थे।

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मोदी सरकार ने सर्वजनिक क्षेत्र को बैंकों को सौगात देने की तैयारी कर ली है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार चालू वित्त वर्ष के शेष महीनों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 83,000 करोड़ रुपये डालेगी। आपको बता दें कि सरकारी बैंक NPA से जूझ रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि एनपीए की पहचान लगभग पूरी हो चुकी है, गैर पहचान वाले अब 0.59% हैं जो मार्च 2015 में 0.7% तक थे। पिछली तिमाही में दिख चुका है कि इसके प्रदर्शन में सुधार हो रहा है। एनपीए में अब गिरावट शुरू हो जाएगी। रीकैपिटलाइजेशन सार्वजनिक क्षेत्र को बैंकों की लोन देने की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा।

लोक सभा में पेश किए गए एक बयान में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वास्तविक व्यय केवल 15070 करोड़ रुपये होगा, क्योंकि बाकी को बचत से वित्त पोषित किया जाएगा। अतिरिक्त खर्च फरवरी में 2018-19 वित्त वर्ष के लिए घोषित 24.42 ट्रिलियन भारतीय रुपये के बजट के टॉप पर है। यह पिछले वित्त वर्ष में यह व्यय 21.43 ट्रिलियन रुपये था। इससे पहले, दिन में सरकार ने अनुपूरक अनुदान मांग की दूसरी किस्त के जरिये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 41,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने के लिये संसद की मंजूरी मांगी।  इससे चालू वित्त वर्ष में बैंकों में 65,000 करोड़ रुपये के बजाए कुल 1.06 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डाली जाएगी।

जेटली ने संवाददाताओं से कहा कि पूंजी डाले जाने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी और आरबीआई के तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) रूपरेखा से बाहर निकलने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में फंसे कर्ज (एनपीए) की पहचान का काम पूरा हो चुका है और एनपीए में कमी आनी शुरू हो गयी है।

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