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कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर सरकार ने जुटाए करीब 33 हजार करोड़, नए फाइनेंशियल ईयर का ये है प्लान

एक अप्रैल से शुरू हुए नए फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के लिये सरकार ने 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है। यह बीते वित्त वर्ष में जुटायी गयी राशि का पांच गुना है।

Modi Government, DisinvestmentFY 2021-22 के लिये सरकार ने 1.75 लाख करोड़ का विनिवेश लक्ष्य रखा है। (Photo-Indian Express )

नए फाइनेंशियल ईयर 2021-22 की शुरुआत हो चुकी है। बीते फाइनेंशियल ईयर में कोरोना की वजह से इकोनॉमी बुरी तरह से प्रभावित हुई। इस दौरान सरकार की कई योजनाओं पर भी असर पड़ा, जिसमें विनिवेश की भी योजना शामिल है।

दरअसल, सरकार ने 2020 फरवरी में आम बजट पेश करते हुए 2.10 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा था। मतलब ये कि सरकार कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर ये रकम जुटाएगी। हालांकि, इसके बाद कोरोना की मार पड़ी और सरकार को लक्ष्य संशोधित करना पड़ा। सरकार ने संशोधित अनुमान में लक्ष्य को कम कर 32,000 करोड़ रुपये कर दिया था। अब सरकार ने इस संशोधित लक्ष्य से अधिक 32,835 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

नए फाइनेंशियल ईयर का प्लान: एक अप्रैल से शुरू हुए नए फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के लिये सरकार ने 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है। यह बीते वित्त वर्ष में जुटाई  गई राशि का पांच गुना है। नए फाइनेंशियल ईयर में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी का आईपीओ लाने की योजना है, वहीं आईडीबीआई बैंक का भी निजीकरण किया जा सकता है।

इसके अलावा एयर इंडिया, बीपीसीएल, पवन हंस, बीईएमएल, एनआईएनल और शिपिंग कार्पोरेशन के निजीकरण की प्रक्रिया भी दूसरे चरण में पहुंच गई है। इन उपक्रमों के लिये सरकार को कई रूचि पत्र मिले हैं।

​कहां बेची हिस्सेदारी: वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार ने शेयर बाजार में सीधे सात बिक्री पेशकश (ओएफएस) के जरिये अपनी हिस्सेदारी बेची। साथ ही इतनी ही संख्या में केंद्रीय लोक उपक्रमों द्वारा शेयरों की पुनर्खरीद पेशकश की गई,जिसमें सरकार ने अपने शेयर बेचे। सात ओएफएस में टाटा कम्युनिकेशंस लिमिटेड (पूर्व में वीएसएनएल) में हिस्सेदारी बिक्री शामिल है।

इनके जरिये सरकारी खजाने को 22,973 करोड़ रुपये मिले। वहीं सात सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज(CPSEs) द्वारा शेयर पुनर्खरीद में अपने शेयरों की पेशकश कर सरकार ने 31 मार्च को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में 3,936 करोड़ रुपये जुटाये।

इसके अलावा रेल टेल, आईआरएफसी और मझगांव डॉक शिपबिर्ल्स शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुए और उनके आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ से 2,802 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। साथ ही एसयूयूटीआई (स्पेसिफाइड अंडरटेकिंग ऑफ द यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया) के अंतर्गत रखी गई कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री के जरिये 3,125 करोड़ रुपये जुटाये गए।

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