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Air India को बंद करना या निजीकरण ही आखिरी विकल्प, सरकार ने बताया आगे का प्लान

Modi government, Air India Disinvestment: एयर इंडिया अब पैसा बना रही है, लेकिन सरकार को प्रतिदिन 20 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

air india,hardeep singh puri, Air India bidएयर इंडिया पर सरकार का पूर्ण स्वामित्व है (Photo-PTI)

सार्वजनिक क्षेत्र की एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया के बिक्री प्रक्रिया को लेकर अब केंद्र सरकार नई तैयारी में जुटी है।

नागर विमानन राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि एयर इंडिया के विनिवेश के लिए वित्तीय बोलियां आगामी दिनों में आमंत्रित की जाएंगी। पुरी ने कहा कि सरकार के सामने एयर इंडिया के निजीकरण करने या उसे बंद करने का ही विकल्प है। निजीकरण होने तक इसे चालू रखना होगा। पुरी ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘अब हम नयी समयसीमा पर विचार कर रहे हैं। मूल्य लगाने के इच्छुक पक्षों के लिए अब डाटा-रुम (सूचना संग्रह) खोल दिया गया है। वित्तीय बोलियों के लिए 64 दिन का समय होगा। उसके बाद सिर्फ फैसला लेने और एयरलाइन ट्रांसफर करने का निर्णय ही शेष होगा।’’

पुरी ने कहा, ‘‘हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। या तो हमें इसका निजीकरण करना होगा या इसे बंद करना होगा। एयर इंडिया अब पैसा बना रही है, लेकिन अभी हमें प्रतिदिन 20 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। कुप्रबंधन की वजह से एयर इंडिया का कुल कर्ज 60,000 करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है।’’

एयर इंडिया के लिए वित्त मंत्री से फंड मांगने का उल्लेख करते हुए पुरी ने कहा, ‘‘मेरी इतनी क्षमता नहीं है कि मैं बार बार निर्मला जी के पास जाऊं और कहूं कि मुझे कुछ और पैसा दे दें।’’उन्होंने कहा कि पूर्व में एयर इंडिया के निजीकरण के प्रयास इसलिए सफल नहीं हो पाए, क्यों उन्हें पूरे दिल से नहीं किया गया था। हरदीप पुरी ने यह भी बताया कि घरेलू विमान सेवा क्षेत्र कोरोना वायरस महामारी से असर से अब उबर रहा है।

आपको बता दें कि एयर इंडिया पर सरकार का पूर्ण स्वामित्व है। वह इसमें अपनी 100 की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए खरीदार तलाशने में लगी। लाभ में चलने वाली इंडियन एयरलाइंस का एयर इंडिया में 2007 में विलय कर दिया गया। उसके बाद यह घाटे में डूबती गयी।

निजीकरण का विरोध करने वाली कांग्रेस पार्टी पर कटाक्ष करते हुए हुए हरदीप पुरी ने कहा, ‘ मैं कन्फ्यूज्ड (भ्रमित) कांग्रेस पॉलीटिशियन (सीसीपी) की बात कर रहा हूं। उन्होंने अपने समय में जो कुछ एक अच्छे काम किए उनमें दो (दिल्ली और मुंबई के) एयरपोर्ट का निजीकरण था। दिल्ली और मुंबई सफलता का उदाहरण हैं।’

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