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केयर्न विवाद: ब्रिटेन की कंपनी से भारत सरकार अलर्ट! बैंकों को दी ये हिदायत

वित्त मंत्रालय ने पीएसबी को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के लिए कहा है, ताकि केयर्न द्वारा किए गए ऐसे किसी भी प्रयास की तुरंत शिकायत की जा सके।

केयर्न एनर्जी और भारत सरकार के बीच टैक्स का विवाद थमता नहीं दिख रहा है (Photo-Indian Express )

ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी और भारत सरकार के बीच टैक्स का विवाद थमता नहीं दिख रहा है। ताजा मामले में वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को आगाह किया है। मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे विदेशों में जमा धन को जब्त करने की ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी द्वारा किसी भी कोशिश के प्रति उच्च सतर्कता रखें।

वित्त मंत्रालय ने पीएसबी को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के लिए कहा है, ताकि केयर्न द्वारा किए गए ऐसे किसी भी प्रयास की तुरंत शिकायत की जा सके।इससे भारत सरकार परिसंपत्तियों को जब्त करने के खिलाफ कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकेगी, क्योंकि बैंकों में जमा धन भारत सरकार का नहीं, बल्कि जनता का है। एजेंसी सूत्रों ने कहा कि इस मामले से निपटने के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि बैंक अपने नास्ट्रो खाते में पर्याप्त धनराशि रख रहे हैं, ताकि व्यापार वित्त और अन्य विदेशी व्यवसायों की गतिविधि सुचारू रूप से जारी रहें। नास्ट्रो खाता एक बैंक द्वारा विदेश के किसी बैंक में खोला गया अकाउंट है, जहां उस देश की मुद्रा में धन रखा जाता है। ऐसे खातों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए और विदेशी मुद्रा लेनदेन को निपटाने के लिए किया जाता है।

आपको बता दें कि ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी के साथ एक टैक्स विवाद में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत का निर्णय भारत सरकार के खिलाफ आया है। मध्यस्थता अदालत ने भारत सरकार को केयर्न एनर्जी का 1.2 अरब डॉलर की राशि चुकाने का आदेश दिया था।

केयर्न ने दी थी चेतावनी: कोर्ट के फैसले के बाद ब्रिटेन की कंपनी केयर्न ने कहा था कि भारत सरकार ने अगर भुगतान नहीं किया, तो वह विदेश में भारतीय परिसंपत्तियों को जब्त करने के लिए कानूनी कदम उठा सकती है। मध्यस्थता आदेश को लागू करने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में पड़े भारतीय बैंकों की नकदी को आसान लक्ष्य माना जाता है।

क्या है मामला: दरअसल, केयर्न ने 1994 में भारत के तेल एवं गैस क्षेत्र में निवेश किया था। एक दशक बाद कंपनी ने राजस्थान में बड़ा तेल भंडार खोजा था। बीएसई में कंपनी 2006 में सूचीबद्ध हुई थी।

पांच साल बाद सरकार ने पिछली तारीख के टैक्स कानून के आधार पर केयर्न से पुनर्गठन के लिए 10,247 करोड़ रुपये का टैक्स चुकाने को कहा था। केयर्न ने इसे हेग में पंचाट न्यायाधिकरण में चुनौती दी थी, जिसमें ब्रिटेन की इस कंपनी को जीत मिली।

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