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PF खाताधारकों के लिए बड़ी खबर, 7 लाख रुपये तक की बीमा को मिली मंजूरी

ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने सितंबर, 2020 की बैठक में इम्पलॉई डिपॉज़िट लिंक्ड इंश्योरेंस योजना (EDLI) के तहत अधिकतम बीमा राशि बढ़ाकर 7 लाख रुपये करने का निर्णय किया था।

epfo news, epfo latest newsअधिकतम 7 लाख रुपये की बीमा को मंजूरी मिली है। (Photo-Indian Express )

नौकरीपेशा शख्स के लिए प्रोविडेंट फंड (पीएफ) की रकम काफी अहम होती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अधीन आने वाले कर्मचारियों को पीएफ अकाउंट पर ब्याज समेत कई सुविधाएं मिलती हैं। इन्हीं में से एक सुविधा बीमा की है। इसके तहत कर्मचारियों को 7 लाख रुपये तक की बीमा मिल रही है। अब श्रम मंत्रालय ने इसकी मंजूरी दी है।

न्यूनतम बीमा राशि 2.5 लाख रुपये: दरअसल, ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने सितंबर, 2020 की बैठक में इम्पलॉई डिपॉज़िट लिंक्ड इंश्योरेंस योजना (EDLI) के तहत अधिकतम बीमा राशि बढ़ाकर 7 लाख रुपये करने का निर्णय किया था। इसके अलावा सीबीटी ने न्यूनतम बीमा राशि 2.5 लाख रुपये बरकरार रखने का भी निर्णय किया था। इस फैसले को श्रम मंत्रालय ने अब मंजूरी दे दी है।

मतलब ये कि ईपीएफओ से जुड़े कर्मचारियों के परिजनों को कम से कम 2.5 लाख रुपये बीमा की रकम​ मिलेगी। वहीं, अधिकतम 7 लाख रुपये की बीमा को मंजूरी मिली है। श्रम मंत्रालय के मुताबिक इसका मकसद योजना से जुड़े उन सदस्यों के परिवार और आश्रितों को राहत प्रदान करना है जिनका सेवा में रहते दुर्भाग्यपूर्ण निधन हो जाता है।

किन कर्मचारियों को सुविधा: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के एक एक्टिव कर्मचारी की अगर सेवा अवधि के दौरान मृत्‍यु हो जाती है तो उसके नॉमिनी को बीमा की रकम का एकमुश्त भुगतान किया जाता है। ईपीएफओ के सदस्य खुद ब खुद इस योजना से जुड़ जाते हैं। इस बीमा के लिए कर्मचारी को कोई रकम नहीं देनी होती है। कर्मचारी के बदले कंपनी प्रीमियम जमा करती है। (ये पढ़ें—पीएफ अकाउंट के ये हैं 4 बड़े फायदे)

शर्तें और कैल्कुलेशन: बीमा की रकम लेने के लिए कुछ शर्तें हैं। मसलन, बीमा राशि पाने के लिए दावेदार को ईपीएफओ सदस्य का मृत्यु प्रमाण पत्र देना होगा। इसके अलावा कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा दावे के मामले में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र देना जरूरी होता है। वहीं, बीमा की राशि का कैल्कुलेशन मृत EPFO कर्मचारी की आखिरी 12 महीनों की सैलरी के आधार पर किया जाता है।

बीमा की रकम पिछले 12 महीनों में मिली सैलरी (बेसिक सैलरी + DA) के 30 गुना ज्यादा होती है। इसकी अधिकतम सीमा 7 लाख रुपये है। बीमा राशि उस स्थिति में नहीं मिलेगी जहां सदस्य ने मृत्यु वाले महीने के पहले 12 महीने की अवधि में एक से अधिक प्रतिष्ठान में काम किया है। (ये पढ़ें-वित्त मंत्री ने नहीं मानी मांग, किया एक बदलाव)

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