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नोटबंदी के दौरान हुई चार लोगों की मौत, सरकार ने पहली बार मानी असुविधा की बात

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बताया है कि तीन कर्मचारियों के सदस्यों और एक ग्राहक की नोटबंदी के दौरान मृत्यु हुई। सरकार ने कहा कि एसबीआई के अलावा अन्य सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने नोटबंदी के कारण शून्य मौतों की सूचना दी है।

Author Updated: December 19, 2018 1:04 PM
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि 2015-16 के दौरान नोटों की छपाई पर 3,421 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

केंद्र सरकार ने पहली बार स्वीकार किया है कि 2016 में हुई नोटबंदी से जुड़े कारणों की वजह से लोगों की मौत हुई थी। सरकार ने कहा कि इससे 4 लोगों की मौत हुई थी। जिनमें तीन बैंक कर्मचारी और एक ग्राहक शामिल थे। नोटबंदी के दौरान इनकी मौत हुई इसके बाद मुआवजे का भुगतान भी किया गया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में ब्योरा देकर स्वीकार किया है कि भारतीय स्टेट बैंक ने इन चार मौतों की सूचना दी। जेटली के जवाब में कहा गया है, “स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बताया है कि तीन कर्मचारियों और एक ग्राहक की नोटबंदी के दौरान मृत्यु हुई।” मंत्री की प्रतिक्रिया सीपीआई (एम) के सांसद इलामाराम करीम के एक सवाल पर आई, जिन्होंने बैंक श्रमिकों सहित लोगों की संख्या के बारे में पूछा, जिन्होंने मानसिक सदमे, काम के दबाव, और नोट बदलने के लिए कतार में खड़े होकर प्रदर्शन के दौरान अपनी जान गंवा दी थी। सरकार ने कहा कि एसबीआई के अलावा, अन्य सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने नोटबंदी के कारण शून्य मौतों की सूचना दी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि ग्राहक को 3 लाख रुपये समेत कुल 44 लाख रुपये का मुआवजा मरने वालों के परिवार के सदस्यों को दिया गया है। विशेष रूप से, उन्होंने यह भी कहा कि “देश में उद्योग और रोजगार की स्थिति पर नोटबंदी का क्या प्रभाव पड़ा इस पर सरकार द्वारा कोई विशिष्ट अध्ययन नहीं किया गया है”। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि 2015-16 के दौरान नोटों की छपाई पर 3,421 करोड़ रुपये के मुकाबले – वर्ष 2016-17 और 2017-18 में क्रमशः बैंकनोटों की प्रिंटिंग पर 7,965 करोड़ रुपये और 4,912 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

नोटबंदी के दौरान वापस लेने वाली मुद्रा पर किए गए खर्च के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि “साल 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में नोटों के भेजने पर 1.09 अरब रुपये, 1.47 अरब रुपये और 1.15 अरब रुपये खर्च किए गए थे।” 8 नवंबर, 2016 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद, सरकार ने काले धन पर रोक लगाने के लिए 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोटों को बंद कर दिया था। देशभर में बैंकों और एटीएम के बाहर लोगों को लंबी लाइनों में देखा गया। लोग अचानक हुई नोटबंदी के बाद नोटों को बदलने या फिर जमा करने के लिए बैंकों में पहुंचे थे।

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