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पाकिस्तान से आए थे महज 1,500 रुपये लेकर, आज भारत के धनकुबेरों में शामिल हैं धर्मपाल गुलाटी, जानें- कैसे मिली सफलता

धर्मपाल गुलाटी के पिता पाकिस्तान में माशियां दी हट्टी के नाम से एक दुकान चलाते थे और मसाले बेचा करते थे। 1919 में उन्होने इस कारोबार की शुरुआत की थी, लेकिन देश विभाजन के पश्चात उन्हें सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा था।

dharmpal gulatiराष्ट्रपति से पद्मभूषण सम्मान हासिल करने के दौरान एमडीएच के फाउंडर महाशय धर्मपाल गुलाटी

मसाला बनाने वाली कंपनी एमडीएच के मुखिया धर्मपाल गुलाटी की कारोबारी सफलता सपनों के सच होने जैसी है। 1947 में देश के विभाजन के पश्चात महज 1,500 रुपये लेकर भारत आए धर्मपाल गुलाटी आज 5,400 करोड़ रुपये की दौलत के मालिक हैं। वह देश के धनकुबेरों की लिस्ट में शामिल सबसे बुजुर्ग व्यक्ति हैं। IIFL वेल्थ हुरुन इंडिया रिच 2020 लिस्ट के मुताबिक वह देश के अमीरों में 216वें नंबर हैं। धर्मपाल गुलाटी के पिता पाकिस्तान में माशियां दी हट्टी के नाम से एक दुकान चलाते थे और मसाले बेचा करते थे। 1919 में उन्होने इस कारोबार की शुरुआत की थी, लेकिन देश विभाजन के पश्चात उन्हें सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा था। परिवार ने अमृतसर में शरण ली थी।

कुछ समय बाद धर्मपाल दिल्ली आ गए थे और अपने पिता के दिए हुए पैसों से एक तांगा खरीदा था। पिता के दिए हुए 1,500 रुपयों में से 650 रुपये खर्च करके उन्होंने वह तांगा लिया था। हालांकि वह इसमें सफल नहीं रहे और फिर उन्होंने अपने पैतृक कारोबार की ओर ही रुख किया। उन्होंने दिल्ली के करोल बाग में मसाले बेचने की एक छोटी सी दुकान खोल ली। यहां धर्मपाल गुलाटी को सफलता मिली तो उन्होंने चांदनी चौक में एक और दुकान खोल ली। इसके बाद कीर्ति नगर में एक फैक्ट्री ही शुरू कर दी। इस तरह से उन्होंने पिता की विरासत माशियां दी हट्टी को एक कंपनी का रूप दिया और नाम रखा एमडीएच।

उनका यह कारोबार सिर्फ भारत में ही नहीं फैला बल्कि वह एक बड़े एक्सोर्टर के तौर पर उभरे। ब्रिटेन समेत यूरोप के कई देशों, यूएई और कनाडा आदि में वह बड़े पैमाने पर मसालों का एक्सपोर्ट करते हैं। हर महीने मसालों के करोड़ों पैकेट बेचने वाली एमडीएच कंपनी फिलहाल देश में मसाला सेक्टर का एक पर्याय बनकर उभरी है। इन्हें यह कंपनी भारत समेत दुनिया के कई देशों में 1,500 डीलर्स के माध्यम से बेचती है। हाल ही में हुरुन इंडिया की ओर से जारी की गई रिच लिस्ट में धर्मपाल गुलाटी को जगह दी गई है और उन्हें ऐसे अमीरों की सूची में रखा है, जिनकी कामयाबी उल्लेखनीय है।

उनके अलावा इस सूची में हुरुन इंडिया ने सोनालिका ट्रैक्टर कंपनी के संस्थापक 89 वर्षीय लक्ष्मण दास मित्तल को भी रखा है। लक्ष्मण दास मित्तल कभी एलआईसी के एजेंट हुआ करते थे, लेकिन फिर उन्होंने कृषि से जुड़े उपकरण तैयार करना शुरू कर दिया था। 1995 में उन्होंने सोनालिका ट्रैक्टर्स की शुरुआत की थी और आज वह 7,700 करोड़ रुपये की दौलत के साथ देश के अमीरों की सूची में 164वें नंबर पर हैं।

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