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मत्स्य संपदा योजना और ई-गोपाला ऐप की PM मोदी ने की लॉन्चिंग, जानें- कैसे पशुपालकों और मछुआरों को होगा फायदा

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि पशुओं की अच्छी नस्ल के साथ ही उनकी देखरेख और उसको लेकर सही वैज्ञानिक जानकारी भी उतनी ही ज़रूरी होती है। इसके लिए भी बीते सालों से निरंतर टेक्नॉलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज ‘ई-गोपाला’ ऐप शुरु किया गया है।

Author Edited By सुदीप अग्रहरि नई दिल्ली | Updated: September 10, 2020 4:26 PM
pm narendra modiस्कीम को लॉन्च करते पीएम नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मत्स्य संपदा योजना को लॉन्च किया है। बिहार सहित 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस योजना का शुभारंभ हो रहा है। इस योजना के तहत 1700 करोड़ रुपये से काम शुरू होने वाला है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने ई-गोपाला ऐप की भी लॉन्चिंग की। यह ऐप किसानों और पशुपालकों के लिए बहुत उपयोगी है। इस ऐप के जरिए किसानों को पशुपालन के पशुओं की अलग-अलग नस्लों के बारे में जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा लेटेस्ट तकनीक के बारे में भी पता चलेगा। इस लॉन्चिंग के दौरान प्रधानमंत्री ने बिहार के पशुपालकों से भी बात की। इस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह भी मौजूद थे। मत्स्य संपदा योजना में बिहार के 6 जिलों को भी शामिल किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ई- गोपाला ऐप एक ऐसा डिजिटल माध्यम होगा जिससे पशुपालकों को उन्नत पशुधन को चुनने में आसानी होगी, इसकी मदद से पशुपालकों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी। यह ऐप पशुपालकों को उत्पादकता से लेकर उसके स्वास्थ्य और आहार से जुड़ी तमाम जानकारियां देगा। उन्होंने कहा कि पशुओं की अच्छी नस्ल के साथ ही उनकी देखरेख और उसको लेकर सही वैज्ञानिक जानकारी भी उतनी ही ज़रूरी होती है। इसके लिए भी बीते सालों से निरंतर टेक्नॉलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज ‘ई-गोपाला’ ऐप शुरु किया गया है।

मत्स्य संपदा योजना पर मोदी ने कहा कि देश के हर हिस्से में, समंदर और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में मछली के कारोबार को ध्यान में रखते हुए पहली बार देश में इतनी बड़ी योजना बनाई गई है। आज़ादी के बाद इस पर जितना निवेश हुआ, उससे भी कई गुना ज्यादा निवेश प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस स्कीम से देश में 55 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

इस योजना के तहत अगले 4-5 वर्षों में इस पर 20 हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। इसलिए यह मत्स्य क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेश है। इस योजना के तहत लगभग 12,340 करोड़ रुपये का निवेश समुद्री, अंतदेर्शीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि में लाभार्थी केन्द्रित गतिविधियों पर तथा 7,710 करोड़ रुपये का निवेश फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रस्तावित है।

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