ताज़ा खबर
 

संजय गांधी थे मारुति के पहले एमडी, मौत के बाद पूरा हुआ था कार बनाने का सपना, लॉन्चिंग में गई थीं इंदिरा गांधी

तब इसे लेकर कई सवाल भी उठे थे कि संजय गांधी या फिर कंपनी के किसी सदस्य के पास कार बनाने का कोई अनुभव नहीं था। कांट्रेक्ट के अनुसार सरकार ने मारुति को देश में प्रति वर्ष 50 हजार सस्ती कीमत की कार बनाने मंजूरी दी थी।

Author Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: September 18, 2020 12:46 PM
indira gandhiमारुति की लॉन्चिंग के मौके पर मौजूद थीं तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी

मारुति सुजुकी आज देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है। इसकी शुरुआत मारुति के नाम से भारत में हुई थी। हालांकि बहुत कम लोग यह बात जानते हैं कि इसके पहले मैनेजिंग डायरेक्टर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी थे। इस कंपनी की स्थापना का किस्सा भी काफी दिलचस्प है। दरअसल दून स्कूल से ड्राप आउट होने के बाद 1964 की शुरुआत में संजय गांधी यूके चले गए थे और वहां रॉल्स रॉयस में उन्होंने इंटर्नशिप भी की थी। इसके बाद 1966 में भारत आने के बाद उन्होंने देश में आम लोगों के लिए कार बनाने का सपना देखना शुरू किया था। यहां तक कि उन्होंने दिल्ली के गुलाबी बाग में एक वर्कशॉप तैयार की थी और यहां उन्होंने कार का बेस फ्रेम भी खुद ही तैयार किया था। इसके बाद अगले दो साल में उन्होंने तीन और प्रोटोटाइप तैयार किए थे।

कहा जाता है कि अपना यही आइडिया उन्होंने तत्कालीन पीएम और मां इंदिरा गांधी से शेयर किया था। संजय गांधी के सुझाव के आधार पर ही इंदिरा गांधी ने कैबिनेट में कार निर्माण के लिए सरकारी कंपनी के गठन का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद 4 जून 1971 को ‘मारुति मोटर्स लिमिटेड’ नामक एक कंपनी का गठन किया गया था और इसके एमडी के तौर पर संजय गांधी को जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि तब इसे लेकर कई सवाल भी उठे थे कि संजय गांधी या फिर कंपनी के किसी सदस्य के पास कार बनाने का कोई अनुभव नहीं था। कांट्रेक्ट के अनुसार सरकार ने मारुति को देश में प्रति वर्ष 50 हजार सस्ती कीमत की कार बनाने मंजूरी दी थी।

कार बनाने के लिए संजय गांधी ने जर्मनी की कार निर्माता कंपनी वॉक्सवैगन से भी बातचीत की थी, लेकिन मारुति का वॉक्सवैगन से कोई समझौता नहीं हो पाया। इसके बाद मारुति का प्रोजेक्ट लटक गया। हालांकि संजय गांधी की मारुति कंपनी को लाइसेंस देने का विपक्ष ने खूब विरोध किया था। हालांकि इस मुद्दे का ज्यादा असर नहीं हुआ था।

संजय गांधी पर किताब लिखने वाले विनोद मेहता ने अपनी किताब ‘द संजय स्टोरी’ में कहा, ‘1971 में पाकिस्तान से युद्ध में जीत और बांग्लादेश की आजादी के बाद सब सरकार के मारूति को कार बनाने के लाइसेंस देने की बात को भूल गए।’ इमरजेंसी के बाद सत्ता में आई जनता पार्टी सरकार ने मारूति प्रोजेक्ट को शटडाउन कर दिया था। जनता पार्टी सरकार ने गांधी परिवार और मारुति प्रोजेक्ट की जांच की जिम्मेदारी शाह कमीशन को सौंपी थी।

इसके बाद 1980 में एक बार फिर से इंदिरा गांधी सत्ता में लौटीं, लेकिन कुछ ही महीनों बाद संजय गांधी हवाई दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस तरह संजय गांधी का मारुति कार देखने का सपना अधूरा रह गया। हालांकि संजय की मौत के बाद मारुति मोटर्स लिमिटेड का जापान की कार निर्माता कंपनी ‘सुजुकी’ के साथ समझौता हुआ। दिसंबर 1983 में संजय गांधी की मौत के बाद मारुति मोटर्स में अपनी कार मारुति 800 को लांच किया। इस तरह संजय गांधी का कार बनाने का सपना पूरा हुआ और मारुति सुजुकी की पहली कार भारत के बाजार में उतरी। यहां तक कि मारुति 800 के पहले ग्राहक को कार की चाबी देने के लिए खुद इंदिरा गांधी गुड़गांव स्थित प्लांट गई थीं। इस दौरान राजीव गांधी भी उनके साथ मौजूद थे।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 आनंद महिंद्रा ने ट्विटर पर पूछा सवाल, कहा- सही जवाब देने वालों को देंगे महिंद्रा की गाड़ी, यूजर मांगने लगे थार
2 ऐप्स बैन किए पर 5जी नेटवर्क से चीनी कंपनियों को बाहर करने का नहीं है कोई प्लान, मंत्री ने दी जानकारी
3 सिर्फ 4 महीनों में बेरोजगार हुए 66 लाख इंजीनियर, टीचर, अकाउंटेंट जैसे पेशवर लोग, मजदूरों पर भी बड़ी मार
IPL 2020 LIVE
X