PL Wealth Market Outlook Report : भारतीय शेयर बाजार इस समय कंसॉलिडेशन के दौर में हैं। यानी तेज गिरावट या तेज उछाल की जगह सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव दिख रहा है। लेकिन पीएल कैपिटल (प्रभुदास लीलाधर) की वेल्थ मैनेजमेंट ब्रांच, पीएल वेल्थ ने अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में बताया है कि इंडियन इक्विटी मार्केट भले ही अभी कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन इकॉनमी में मजबूती बनी हुई है, और मीडियम-टर्म में रिस्क-रिवॉर्ड डायनामिक्स में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। 

मार्केट आउटलुक फरवरी 2026 के नाम से जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक मीडियम टर्म यानी अगले 6 से 24 महीनों में बाजार का रिस्क-रिवॉर्ड बैलेंस धीरे-धीरे बेहतर होने की संभावना दिख रही है। इसकी बड़ी वजह ये है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है।

बजट से मिला लॉन्ग टर्म ग्रोथ का संकेत

रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए पेश केंद्र सरकार के बजट ने नीतियों में निरंतरता और लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर फोकस रखा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडीचर (Capex) यानी पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जबकि राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के लक्ष्य को भी जीडीपी के 4.3% पर सीमित रखा गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इकॉनमी पर लगातार जोर दिए जाने से पता चलता है कि यह कोई तात्कालिक राहत पैकेज नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म ग्रोथ का ब्लूप्रिंट है। भले ही सरकारी उधारी बढ़ने से बॉन्ड यील्ड पर कुछ दबाव बना हो, लेकिन कंपनियों की कमाई की संभावनाओं में सुधार हो रहा है।

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सेक्टर्स की स्थिति में दिखेगा बदलाव

रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच शॉर्ट टर्म में सेक्टर्स की स्थिति में तेजी से रोटेशन या बदलाव देखने को मिल सकता है। खासकर वैल्यूएशन-सेंसिटिव और फ्लो-ड्रिवन सेगमेंट्स में ऐसा हो सकता है। ऐसे में निवेशकों की रणनीति डोमेस्टिक पॉलिसी से जुड़े संकेतों और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर निर्भर करेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मीडियम टर्म में इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, लॉजिस्टिक्स, कैपिटल गुड्स और चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बेहतर स्थिति में रह सकते हैं। वहीं इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल्स और जेम्स एंड ज्वैलरी जैसे एक्सपोर्ट-ड्रिवन सेगमेंट्स को सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन और ट्रेड विजिबिलिटी से फायदा मिल सकता है। रिपोर्ट में उन कंपनियों में निवेश को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जिनकी बैलेंस शीट मजबूत और कमाई स्टेबल हो।

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क्यों मजबूत है मैक्रो आउटलुक 

भारत की ग्रोथ दर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाए हुए है। वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी ग्रोथ करीब 7.4% रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 में यह 6.8–7.2% तक रह सकती है।
महंगाई में खासकर कोर लेवल पर नरमी आई है, जिससे मॉनेटरी पॉलिसी के संतुलित रहने की उम्मीद है। लिक्विडिटी की स्थिति स्टेबल है और क्रेडिट ग्रोथ बनी हुई है। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू अर्थव्यवस्था का इकनॉमिक साइकल अहम मोड़ पर पहुंच रहा है।

कमाई में रीसेट, लेकिन रिकवरी की उम्मीद

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में कंपनियों की कमाई के अनुमानों में कटौती हुई है, लेकिन अब डाउनग्रेड की रफ्तार धीमी पड़ रही है। फाइनेंशियल्स, ऑटो और आईटी सर्विसेज ने तुलनात्मक रूप से मजबूती दिखाई है। जैसे-जैसे सरकारी खर्च का असर दिखेगा और ऑर्डर इनफ्लो रेवेन्यू में तब्दील होगा, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कमाई में रिकवरी का दायरा बढ़ेगा। यह स्थिति बाजार के लिए अगला मजबूत ट्रिगर बन सकती है।

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कैसा होना चाहिए एसेट एलोकेशन

रिपोर्ट के पोस्ट-बजट एसेट एलोकेशन फ्रेमवर्क के मुताबिक जोखिम प्रोफाइल के हिसाब से निवेश रणनीति तय करनी चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक कंजर्वेटिव निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में फिक्स्ड इनकम का हिस्सा ज्यादा यानी 45–50% तक रखना चाहिए। वहीं बैलेंस्ड पोर्टफोलियो में इक्विटी का वेटेज ज्यादा यानी 50–55% तक हो सकता है। ज्यादा एग्रेसिव और ग्रोथ ओरिएंटेड पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा 60–65% तक भी रखा जा सकता है। सभी कैटेगरी के पोर्टफोलियो में टैक्टिकल कैश का हिस्सा 5% के आसपास रखने की सलाह दी गई है, ताकि बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल में फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहे। अल्टरनेटिव एसेट्स जैसे – इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs), रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और प्राइवेट क्रेडिट को पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन के लिए जगह दी जा सकती है, क्योंकि ये तुलनात्मक रूप से स्टेबल कैश फ्लो देने की क्षमता रखते हैं।

बजट के बाद एसेट एलोकेशन की संभावित रणनीति

Asset ClassConservativeBalancedAggressive
Equities40–45%50–55%60–65%
Fixed Income45–50%30–35%15–20%
Alternatives5–10%10–15%15–20%
Cash / Tactical~5%~5%~5%

(Source : PL Wealth Report)

गोल्ड बनाम सिल्वर 

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी फेड के रेट कट के बाद गोल्ड ने एक बार फिर डिफेंसिव एसेट की भूमिका निभाई है। जियो-पोलिटिकल टेंशन और बदलती नीतियों के दौर में इसकी मांग बनी हुई है। इसके उलट सिल्वर में तेज और अस्थिर करेक्शन देखा गया, जो मुख्य रूप से सट्टेबाजी वाली पोजिशनिंग से जुड़ा था। इसका मतलब यह है कि टेंशन के समय गोल्ड ज्यादा स्टेबल रहता है, जबकि सिल्वर हाई-बीटा एसेट की तरह बर्ताव करता है।

आने वाले 1-2 साल में बेहतरी की उम्मीद

पीएल वेल्थ मैनेजमेंट के सीईओ इंदरबीर सिंह जॉली के मुताबिक “भारतीय बाजार फिलहाल अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच कमाई के नए वैल्यूएशन के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन घरेलू तौर पर फंडामेंटल्स मजबूत बने हुए हैं। सरकार लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर रही है और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियां चला रही है, जिससे कंपनियों के लिए लंबे समय में अच्छी ग्रोथ का रास्ता बन रहा है। हालांकि अगले कुछ समय में बाजार अंतरराष्ट्री खबरों की वजह से ऊपर-नीचे होता रहेगा, लेकिन हमारा मानना है कि आने वाले 1-2 साल में मौके बहुत अच्छे दिख रहे हैं। जैसे-जैसे सरकार का खर्च असर दिखाएगा, कंपनियों की कमाई बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा, बाजार धीरे-धीरे ज्यादा स्थिर और मजबूत मार्केट साइकल में प्रवेश करेगा।”

रिपोर्ट में कुल मिलाकर यह उम्मीद जाहिर की गई निकट भविष्य में बाजार रेंज-बाउंड और इवेंट-ड्रिवन रह सकता है। लेकिन मीडियम टर्म में भारत के डेमोग्रैफिक एडवांटेज, इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर, मैन्युफैक्चरिंग पुश और पॉलिसी में निरंतरता जैसे फैक्टर मिलकर निवेश का आधार मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में बाजार धीरे-धीरे कंसॉलिडेशन से निकलकर ज्यादा स्टेबल एक्सपेंशन के दौर में पहुंच सकता है।

(डिस्क्लेमर : इस लेख का मकसद सिर्फ जानकारी देना है, निवेश की सलाह देना नहीं। यहां दी गई कोई भी राय संबंधित रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स की है। निवेश के बारे में कोई भी फैसला करने से पहले सेबी से मान्यताप्राप्त निवेश सलाहकार से परामर्श जरूर करें। निवेश से होने वाले किसी भी लाभ या हानि के लिए वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी।)