बाजार आपके द्वार

कोरोना संकट के कारण बीते साल से अब तक आए बदलाव का एक रंग यह भी है कि एक तरफ घर से बाहर अनावश्यक निकलने को लेकर हिचक जहां अब भी बरकरार है, वहीं खरीदारी के आनलाइन विकल्प को आजमाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

सांकेतिक फोटो।

प्रेम प्रकाश

कोरोना संकट के कारण बीते साल से अब तक आए बदलाव का एक रंग यह भी है कि एक तरफ घर से बाहर अनावश्यक निकलने को लेकर हिचक जहां अब भी बरकरार है, वहीं खरीदारी के आनलाइन विकल्प को आजमाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस तरह हमारी इच्छा और आपूर्ति की दूरी स्मार्टफोन के एक बटन दबाने भर की रह गई है। त्योहारी मौसम में बाजार और खरीदारी से जुड़े दिलचस्प संदर्भों पर विशेष

बाजार आपकी हसरतों पर नजर ही नहीं रखता उसे अपने अनुसार गढ़ता भी है। उसकी समझ इतनी मजबूत है कि वह आपकी दमित इच्छाओं को ज्यादा समय तक स्थगित नहीं रहने देता है। वह दौर गया जब आमदनी और खरीदारी का संबंध मानवीय विवेक से तय होता था। अब सब कुछ बाजार की निगरानी में है। उसकी रणनीति के तहत है। इन बातों को कहना-समझना तब ज्यादा जरूरी और दिलचस्प हो जाता है जब हम इस तजुर्बे से भरे हैं कि कोरोना संकट ने जहां आमदनी के वजन को काफी कम कर दिया है, वहीं कमाई के कई पुराने जरिए बंद तालों में तब्दील हो गए हैं। ऐसे में एक उत्सवधर्मी देश के लिए त्योहारी खुशी का रास्ता बाजार तक किस तरह खुल रहा है, वह रोचक तो है ही साथ ही भविष्य के लिए एक वित्तीय सबक भी।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सेहत अब हमारे लिए रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा सरोकार है। पिछले डेढ़ साल से ज्यादा समय में स्वास्थ्य को लेकर आई जागरूकता ने जीवन और समाज को ही नहीं बदला है बल्कि उससे हमारा पूरा परिवेश बदल गया है। घर में ज्यादा से ज्यादा रहना और अनावश्यक बाहर न निकलने के एहतियात के बीच अगर कुछ यथावत है तो वह खुशियां बटोर लेने की हमारी भौतिक कामनाएं हैं। इन कामनाओं की ही देन है कि हमारी हर मुराद पर बाजार का विनम्र अभिवादन हमारे द्वार तक पहुंच जाता है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं आनलाइन खरीदारी के गहराते चलन की। गौरतलब है कि इस मामले में भारत दुनिया से अलग नहीं बल्कि सबके साथ खड़ा है।
आंकड़ा और प्रवृत्ति
कंसल्टेंसी कंपनी ‘रेडसीयर’ के अनुसार भारत की उपभोक्ता डिजिटल अर्थव्यवस्था 2030 तक 800 अरब डालर की हो जाएगी। 2020 में यह 85-90 अरब डालर का बाजार था। इसकी मुख्य वजह देश में ई-कामर्स और डिजिटल शिक्षा-प्रौद्योगिकी जैसी आनलाइन सेवाओं की बढ़ी लोकप्रियता है। भारत का आनलाइन खुदरा बाजार 2030 तक 350 अरब डालर का आंकड़ा छूने के साथ अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। इसके साथ ही किराना कारोबार भी 2030 तक करीब 1,500 अरब डालर तक पहुचने का अनुमान है। कुछ महीने पहले रेडसीयर के ‘ग्राउंड जीरो 5.0’ कार्यक्रम में यह जानकारी साझा की गई।
कोरोनाकाल का तजुर्बा
कंपनी के संस्थापक और सीईओ अनिल कुमार अपने तजुर्बे से बताते हैं कि आज 50 फीसद से ज्यादा ग्राहक कहते हैं कि वे सुविधा की वजह से आनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। कुछ साल पहले करीब 70 फीसद ग्राहक कहते थे कि उनके इस्तेमाल की मुख्य वजह कीमतों में छूट है, लेकिन कोविड-19 आने के साथ डिजिटल सेवाओं ने निस्संदेह रूप से ग्राहकों की काफी सेवा की है। यह बात ग्राहकों की संतुष्टि और अपनी जरूरतों के लिए डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल जारी रखने की इच्छा से साफ झलकती है।
चलन भी, परिवर्तन भी
अलग-अलग अध्ययनों-सर्वेक्षणों में आनलाइन बाजार के आकार और प्रसार को लेकर विरोधाभासी आंकड़े दिए जा रहे हैं। पर जो बात इन सबमें समान है वह यह कि खरीदारी का यह नया जरिया तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। फिलहाल देश में 800 अरब डालर की आनलाइन खरीदारी हो रही है। यह आंकड़ा 2025 में बढ़कर 2,000 अरब डालर हो जाएगा, ऐसा ई-कामर्स कंपनी ‘स्नैपडील’ का अंदाजा है। देश की इस प्रमुख ई-कामर्स कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कारपोरेट मामले एवं संचार) रजनीश वाही बताते हैं कि पिछले कुछ सालों से जोरदार वृद्धि के बावजूद देश में आनलाइन खरीदारी अभी भी महज 2-3 फीसद ही है पर यह क्षेत्र तेजी से वृद्धि बरकरार रखते हुए 2025 तक दस फीसद तक पहुंच जाएगा।

इसके साथ ही भारतीय बाजार की बनावट और विस्तार को लेकर एक और तथ्य समझने का है। यहां एक अनुमान के मुताबिक दस फीसद खुदरा बाजार संगठित क्षेत्र से जुड़ा है जबकि 90 फीसद खुदरा बाजार असंगठित क्षेत्र से। पर नया यथार्थ बदलाव के किस झुकाव की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, उसकी वजहों को समझना जरूरी है। सस्ती इंटरनेट सेवा और सस्ते स्मार्टफोन उपलब्ध होने के कारण तकरीबन 85 करोड़ भारतीय इंटरनेट से जुड़ गए हैं। पहले देश के दस करोड़ आनलाइन खरीदार मुख्य तौर पर बड़े शहरों से थे, लेकिन अब ई-कामर्स का देश के छोटे और मझोले शहरों में तेजी से विस्तार हो रहा है। अकेले एक कंपनी स्नैपडील पर हर महीने लगभग 7.7 करोड़ उपभोक्ता आते हैं।
सिमटा फासला
संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में 145 करोड़ से ज्यादा लोगों नें दुनियाभर में आनलाइन खरीदारी की थी जो भारत की कुल आबादी से भी ज्यादा है। साफ है कि बाजार के खुलेपन का उत्तर चरण शुरू हो गया है। अब बाजार के दायरे में घर और घर में रहने वालों का पूरा मनोविज्ञान है। इच्छा और खरीदारी का फासला बस स्मार्टफोन के एक बटन पर आकर टिक गया है। कोरोनाकाल के एहतियात की वजह से खरीदारी की प्रवृत्ति में क्षेत्रीय अंतर भी आया है। एमेजन इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट मनीष तिवारी इस लिहाज से 2020 को अहम मानते हैं। वे बताते हैं कि पिछले मार्च से अब तक उनकी साइट में साइनअप करने वालों में 80-90 फीसद लोग छोटे शहरों के होते हैं। यह डिजिटल भारत की नई शिनाख्त से ज्यादा देश में ई-बाजार के प्रसार का दोहराता-तिहराता यथार्थ है।

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