ताज़ा खबर
 

विनिर्माण पीएमआई फरवरी में लगातार दूसरे महीने बेहतर, पिछले ढाई साल में सबसे तेज़

यह पिछले ढाई साल में सबसे स्पष्ट तेजी है जिसके चलते कारखाना शुल्कों में बढ़ोतरी हुई और यह पिछले 40 महीने में सबसे तेज गति से बढ़ी।

Author नई दिल्ली | March 1, 2017 3:26 PM
पीएमआई का 50 से ऊपर रहना वृद्धि को और इससे नीचे रहना संबंधित क्षेत्र में मंदी को दर्शाता है।

भारतीय विनिर्माण क्षेत्र फरवरी में मामूली तौर पर बेहतर हुआ है। एक मासिक सर्वेक्षण के मुताबिक इसमें लगातार दूसरे महीने सुधार देखा गया है क्योंकि इस अवधि में निर्यात मांग फिर बढ़ने से कुल नए ऑर्डरों का विस्तार हुआ है। निक्की मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अनुसार फरवरी में विनिर्माण सूचकांक बढ़कर 50.7 रहा जो जनवरी के 50.4 के आंकड़े से अधिक है। ऐसे में नोटबंदी के बाद फरवरी लगातार दूसरा महीना है जब विनिर्माण पीएमआई बढ़ा है। पीएमआई का 50 से ऊपर रहना वृद्धि को और इससे नीचे रहना संबंधित क्षेत्र में मंदी को दर्शाता है।

इस रपट की सह लेखिका और आईएचएस मार्किट में अर्थशास्त्री पॉलीयाना डी लीमा ने कहा, ‘भारतीय विनिर्माताओं को मांग बढ़ने का लाभ मिला है। साथ ही नए काम के क्षेत्र में विस्तार होने से उन्होंने उत्पादन भी बढ़ाया है।’ सर्वेक्षण के अनुसार कीमत के स्तर पर फरवरी में लागत और तैयार माल दोनों की मुद्रास्फीति तेज हुई है। लीमा ने कहा कि वस्तुओं की कीमत ऊंची रहने से विनिर्माताओं को लागत बढ़ने का बोझ देखना पड़ा। इससे फरवरी में मुद्रास्फीति की दर में एक तीव्र तेजी देखने को मिली। यह पिछले ढाई साल में सबसे स्पष्ट तेजी है जिसके चलते कारखाना शुल्कों में बढ़ोतरी हुई और यह पिछले 40 महीने में सबसे तेज गति से बढ़ी। इससे पहले अक्टूबर 2013 में मुद्रास्फीति की दर सबसे मजबूत थी।

नोटंबदी को दरकिनार कर Q3 में जीडीपी वृद्धि दर 7%, पूरे वर्ष का वृद्धि अनुमान 7.1% पर बरकरार

नोटबंदी की वजह से आर्थिक गतिविधियों के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंकाओं को दरकिनार करते हुये चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रही है, जबकि पूरे वर्ष की वृद्धि का दूसरा अग्रिम अनुमान भी 7.1 प्रतिशत पर पूर्ववत रहा है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के मंगलवार (28 फरवरी) को जारी तीसरी तिमाही और पूरे वर्ष के अग्रिम अनुमान में चालू वित्त वर्ष की वृद्धि दर को 7.1 प्रतिशत पर कायम रखा है। इससे पहले जनवरी में नोटबंदी के प्रभाव को शामिल किये बिना जारी पहले अग्रिम अनुमान में भी पूरे वर्ष की वृद्धि का यही आंकड़ा जारी किया गया था। इस बीच, सीएसओ ने पहली और दूसरी तिमाही के जीडीपी वृद्धि के संशोधित आंकड़े जारी किये हैं जिनमें पहली तिमाही में संशोधित वृद्धि दर बढ़कर 7.2 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 7.4 प्रतिशत हो गई।

ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि तीसरी तिमाही के मध्य में (8 नवंबर, 2016) के नोटबंदी के फैसले से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुये होंगे। भारतीय रिजर्व बैंक के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) तथा आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने इस दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को कम किया है। इन संगठनों का मानना है कि नोटबंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर अल्पावधि असर हुआ है। सीएसओ ने बयान में कहा कि वर्ष (2011-12) के स्थिर मूल्य पर वास्तविक जीडीपी 2016-17 में 121.65 लाख करोड़ रुपए पर कायम रहने का अनुमान है। जनवरी, 2017 में जारी पहले संशोधित अनुमान में 2015-16 के लिए इसके 113.58 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया गया था।

नोटबंदी के बावजूद भारत की विकास दर 7 प्रतिशत पर बरकरार; चीन दूसरे नंबर पर

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App