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मैन्युफैक्चरिंग में जुलाई में भी गिरावट का दौर जारी, नए ऑर्डर न मिलने से कंपनियां पस्त, अब भी कर रहीं कर्मचारियों की छंटनी

आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री एलियॉट केर ने कहा, ‘भारत में मैन्युफैक्चरिंग के ताजा पीएमआई के आंकड़े कोविड- 19 महामारी से अधिक प्रभावित देशों में शामिल देश की आर्थिक स्थिति पर अधिक प्रकाश डालते

manufacturingजुलाई महीने में भी मैन्युफैक्चरिंग ऐक्टिविटी में गिरावट

मांग में कमी होने और कई शहरों में नए सिरे से लॉकडाउन लागू के चलते जुलाई महीने में मैन्युफैक्चरिंग ऐक्टिविटी में गिरावट देखने को मिली है। लंबे लॉकडाउन के बाद मांग कमजोर रहने से कारखानों ने अपने कर्मचारियों की संख्या में तो कमी की ही है, खरीद गतिविधियां भी कम हुई हैं। एक मासिक सर्वे में सोमवार को यह जानकारी सामने आई। आईएचएस मार्किट की ओर से जारी परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स के मुताबिक जुलाई महीने में मैन्युफैक्चरिंग का आंकड़ा 46 रहा है, जो जून महीने में 47.2 था। बता दें कि लगातार 32 महीने की ग्रोथ के बाद अप्रैल महीने में परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स में कमजोरी देखने को मिली थी। पीएमआई का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में वृद्धि को दर्शाता है, जबकि इससे नीचे रहनो इसमें दबाव अथवा संकुचन को दर्शाता है।

आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री एलियॉट केर ने कहा, ‘भारत में मैन्युफैक्चरिंग के ताजा पीएमआई के आंकड़े कोविड- 19 महामारी से अधिक प्रभावित देशों में शामिल देश की आर्थिक स्थिति पर अधिक प्रकाश डालते हैं।’ केर ने कहा कि सर्वेक्षण के परिणाम दिखाते हैं कि कारखानों में उत्पादन और नए आर्डर मिलने के महत्वपूर्ण सूचकांक में गिरावट फिर से बढ़ी है। इससे पिछले दो माह के दौरान जो स्थिरीकरण का रुझान दिख रहा था वह कमजोर पड़ गया।

उन्होंने कहा कि प्राप्त संकेत यह बताते हैं कि कंपनियां काम के लिए अभी जद्दोजहद में हैं क्योंकि उनके कुछ खरीदार अभी भी लॉकडाउन में हैं। इससे पता चलता है कि जब तक संक्रमण दर कम नहीं होती है और प्रतिबंध नहीं हटते हैं गतिविधयों के जोर पकड़ने की संभावना नहीं है। सर्वेक्षण बताता है कि जून के मुकाबले जुलाई में संकुचन कुछ तेज हुआ है, क्योंकि मांग की स्थिति अभी भी कमजोर है। कई राज्यों में लॉकडाउन बढ़ने से कुछ व्यवसाय अभी भी बंद पड़े हैं।

निर्यात आर्डर में भी गिरावट देखी गई है। सर्वेक्षण में भाग लेने वालों का कहना है कि उनके अंतरराष्ट्रीय खरीदार आर्डर देने में हिचकिचा रहे हैं क्योंकि महामारी को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। कमजोर मांग की स्थिति के चलते भारतीय विनिर्माताओं ने जुलाई में कर्मचारियों की संख्या में कटौती को जारी रखा है। हालांकि, सर्वेक्षण में कोविड- 19 के जारी नकारात्मक प्रभाव के बावजूद लगातार दूसरे माह भविष्य की गतिविधियों को लेकर धारणा में सुधार देखा गया।

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