अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के बाद भारत ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स में भारी बढ़ोतरी की है।
डीजल एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि ATF एक्सपोर्ट पर लेवी लगभग दोगुनी होकर 7.5 रुपये प्रति लीटर से 14.5 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
इसके उलट, सरकार ने पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 4 रुपये से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दी है। टैक्स की नई दरें आज, 16 जुलाई से लागू हो गई हैं।
एक्सपोर्ट टैक्स में बढ़ोतरी से विदेशी शिपमेंट कम हो सकते हैं?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपोर्ट टैक्स में बढ़ोतरी से विदेशी शिपमेंट कम हो सकते हैं, ऐसे समय में जब भारत का फ्यूल एक्सपोर्ट सितंबर के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने की राह पर है।
यह कदम ग्लोबल क्रूड मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव के बाद उठाया गया है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
इस हफ़्ते की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ने के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे यह डर बढ़ गया कि क्षेत्रीय सप्लाई में रुकावट से ग्लोबल ऑयल मार्केट पर असर पड़ सकता है।
भारत ने थोक में ईंधन की खरीद को कुछ समय के लिए क्यों रोका और ये पाबंदियां क्यों हटाई गईं?
सरकार ने जून में इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल ग्राहकों के लिए रिटेल फ्यूल स्टेशनों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी थी। उन्हें थोक सप्लाई चैनलों के जरिए ईंधन खरीदने के लिए कहा गया था।
यह कदम आम जनता के लिए ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने, जमाखोरी रोकने और ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता के समय सप्लाई के डायवर्जन को रोकने के लिए उठाया गया था।
हालांकि शुरू में ये पाबंदियां 90 दिनों तक लागू रखने की इजाजत थी, लेकिन सरकार ने 29 जून को इन्हें हटा लिया और 1 जुलाई से सामान्य बिक्री फिर से शुरू हो गई।
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मई 2026 में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह फैसला लिया गया है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
