महंगाई भत्ता (Dearness Allowance-DA) केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यह बढ़ती महंगाई के असर से उनकी आय को बचाने का काम करता है। अब 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की प्रक्रिया तेज होने के साथ ही DA की गणना के तरीके में बदलाव से जुड़ी कर्मचारियों की पुरानी लेकिन अहम मांगें फिर चर्चा में आ गई हैं।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को सौंपे गए अपने ज्ञापन में DA कैलकुलेशन सिस्टम में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है।
NC-JCM (स्टाफ साइड) द्वारा 8वें वेतन आयोग को दिए गए ज्ञापन के अनुसार, मौजूदा DA कैलकुलेशन सिस्टम कर्मचारियों पर पड़ने वाले वास्तविक महंगाई बोझ को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
8वें वेतन आयोग के तहत स्टाफ साइड की ओर से DA में मांगे गए 7 बड़े बदलाव
कम एवरेजिंग पीरियड का इस्तेमाल करके हर 6 महीने में DA कैलकुलेशन
अभी डीए में बदलाव लंबे समय में औसत महंगाई डेटा पर आधारित होते हैं, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव आसान हो जाता है। स्टाफ साइड ने मौजूदा 12-महीने के एवरेज फॉर्मूले को 6-महीने के एवरेज से बदलने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें DA में बदलाव साल में दो बार होंगे। तर्क यह है कि इससे DA महंगाई के प्रति ज्यादा रिस्पॉन्सिव हो जाएगा।
अलग महंगाई बास्केट
एक बड़ी मांग सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अलग कंजम्पशन बास्केट बनाना है, न कि एक आम महंगाई बेंचमार्क पर निर्भर रहना। स्टाफ पक्ष का तर्क है कि सरकारी कर्मचारियों के खर्च करने के तरीके अलग-अलग होते हैं और उन्हें खाना, घर, शिक्षा, हेल्थकेयर और ट्रांसपोर्ट जैसे खर्चों का हिसाब रखना चाहिए। इससे डीए के लिए महंगाई कैलकुलेशन का एक अलग बेस बन सकता है।
पॉइंट-टू-पॉइंट डीए कैलकुलेशन की वापसी
एक और जरूरी प्रस्ताव पॉइंट-टू-पॉइंट डीए कैलकुलेशन को फिर से शुरू करना है। इस तरीके के तहत डीए दो पॉइंट्स के बीच असल महंगाई मूवमेंट पर आधारित होगा, न कि एक स्मूद एवरेज मैकेनिज्म पर। स्टाफ पक्ष का मानना है कि इससे कीमतों में तेज बढ़ोतरी को बेहतर ढंग से पकड़ा जा सकेगा।
डीए को नीचे की ओर राउंडिंग नहीं करना
मेमोरेंडम में उन राउंडिंग प्रैक्टिस पर भी आपत्ति जताई गई है जिनसे देने वाला डीए कम हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर DA 5.5% बनता है, तो स्टाफ पक्ष की मांग के अनुसार, इसे 5% तक राउंड डाउन नहीं किया जाना चाहिए।
कंट्रोल्ड प्राइस के अंदाजों के बजाय मार्केट प्राइस का इस्तेमाल
स्टाफ साइड ने यह भी कहा है कि DA कैलकुलेशन में कर्मचारियों द्वारा दिए गए असल मार्केट प्राइस दिखने चाहिए।
25% के बाद DA को बेसिक पे के साथ मर्ज
सबसे जरूरी प्रस्तावों में से एक है DA को 25% से ज्यादा होने पर बेसिक पे के साथ मर्ज करना। मेमोरेंडम के मुताबिक, 8th CPC कर्मचारियों के लिए DA/DR को बेसिक पे और पेंशनर्स के लिए बेसिक पेंशन के साथ मर्ज करने की सिफारिश कर सकता है। अगर इसे मान लिया जाता है, तो इससे सैलरी स्ट्रक्चर में काफी बदलाव आ सकता है।
अलाउंस में ऑटोमैटिक DA-लिंक्ड रिवीजन
स्टाफ साइड ने कई अलाउंस को DA से लिंक करने की भी मांग की है ताकि वे महंगाई के साथ ऑटोमैटिक रूप से बढ़ें।
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8वें वेतन आयोग और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच मीटिंग कई मजबूत मांगों के साथ शुरू हुई है, जिसमें मिनिमम सैलरी में भारी बढ़ोतरी से लेकर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को खत्म करने तक शामिल है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
[ डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में बताई गई मांगें नेशनल काउंसिल-JCM के स्टाफ की तरफ से 8वें पे कमीशन को दिए गए प्रस्ताव हैं और ये सरकार द्वारा मंज़ूर फैसले नहीं हैं। महंगाई भत्ते के कैलकुलेशन, पे स्ट्रक्चर, या पेंशन बेनिफिट्स में कोई भी बदलाव फाइनल सिफारिशों पर निर्भर करेगा। ]
