Exclusive: भारत ने पांचवीं पीढ़ी के देसी स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए अहम कदम उठाया है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने प्रस्तावित एएमसीए के प्रोटोटाइप डिजाइन और डेवलप करने के लिए तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है।

इनमें सबसे बड़ी दावेदार के तौर पर टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड उभरी है, जबकि लार्सन एंड टुब्रो–भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह शामिल है।

AMCA प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारत का देसी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर बनाना है, जो एडवांस्ड स्टील्थ कोटिंग्स और अंदरूनी वेपन बे वाला एक सिंगल-सीट ट्विन-इंजन जेट है। इससे 125 से ज्यादा फाइटर जेट बनने की उम्मीद है। एयर फोर्स में यह फाइटर जेट 2035 तक शामिल होने के लिए तैयार हो सकते हैं। इसके बाद भारत अमेरिका (F-22 और F-35), चीन (J-20) और रूस (Su-57) जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट वाले देशों की छोटी लिस्ट में शामिल हो जाएगा।

DRDO ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के जरिए जुलाई 2025 में टेंडर जारी किए थे। शुरू में अडानी डिफेंस और HAL समेत 7 ग्रुप ने AMCA प्रोजेक्ट के लिए DRDO के साथ पार्टनरशिप करने के लिए बोली लगाई थी। शॉर्टलिस्ट किए गए बिडर्स को मैन्युफैक्चरिंग राइट्स दिए जाने से पहले AMCA के मॉडल बनाने के लिए सरकार से फंडिंग सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

AMCA प्रोजेक्ट भारत की एयर फोर्स को मॉडर्न बनाने की कोशिश को दिखाता है, जिसमें हथियार और इक्विपमेंट अपग्रेड शामिल हैं। इस बड़े मॉडर्नाइजेशन की कोशिश के तहत, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने पिछले गुरुवार को IAF के लिए एक इंटर-गवर्नमेंटल डील के तहत फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के लंबे समय से इंतजार किए जा रहे प्रपोजल को अलग से मंजूरी दे दी थी।

इनमें से 90 जेट भारत में बनाए जाएंगे। यह मंजूरी फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों के 17 और 19 फरवरी के बीच होने वाले भारत दौरे से कुछ दिन पहले मिली।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली DAC ने नेवी के लिए यूएस से छह और P8I मैरीटाइम सर्विलांस और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर एयरक्राफ्ट खरीदने को भी मंजूरी दी थी।

जनसत्ता के सहयोगी द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकारी कंपनी HAL ने गलत बोली लगाई क्योंकि सिर्फ इवैल्यूएशन क्राइटेरिया में नहीं, बल्कि जरूरी क्राइटेरिया में पेपरवर्क में गलती थी। हालांकि थ्योरी के हिसाब से HAL को बाद में बोली लगाने की इजाजत दी जा सकती थी, लेकिन सूत्रों ने बताया कि प्रोटोटाइप बनाने वाली कंपनी को पूरी तरह से आगे बढ़ने का फायदा है।

हालांकि बोली लगाने के मामलों पर HAL को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन HAL के CMD, डीके सुनील ने पिछले हफ्ते कहा था कि बेंगलुरु की सरकारी कंपनी देसी पांचवीं पीढ़ी के फ़ाइटर जेट के लाइसेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया में हिस्सा लेगी, भले ही दो दूसरी कंपनियों के साथ बनाया गया उसका ग्रुप शुरुआती स्क्रीनिंग प्रक्रिया में शॉर्टलिस्ट न हो।

उन्होंने पिछले हफ्ते द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमें स्क्रीनिंग प्रोसेस में शॉर्टलिस्ट की जा रही कंपनियों के बारे में अभी तक कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं मिली है,” उन्होंने आगे कहा कि AMCA एक 10 साल का प्रोग्राम है और “अगर हम यह भी मान लें कि HAL को एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप बनाने के लिए शुरुआती स्क्रीनिंग में शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया है, तो भी हम तब बोली लगाएंगे जब जेट की लाइसेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए नए टेंडर जारी किए जाएंगे।”

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