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डीजल कारों पर प्रतिबंध से चिंता में डूबा वाहन उद्योग

राजधानी में नए डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश की खिलाफत करते हुए वाहन विनिर्माताओं ने शनिवार को कहा कि न्यायाधिकरण को प्रदूषण नियंत्रण के...

Author नई दिल्ली | Published on: December 13, 2015 1:43 AM

राजधानी में नए डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश की खिलाफत करते हुए वाहन विनिर्माताओं ने शनिवार को कहा कि न्यायाधिकरण को प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी तथ्यों और आंकड़ों पर विचार करने के बाद ही समग्र रुख अपनाना चाहिए।

महिंद्रा एंड महिंद्रा के कार्यकारी निदेशक पवन गोयनका ने एक कांफ्रेंस कॉल में कहा कि राजधानी में आबोहवा में सुधार लाने के लिए पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाना स्वागत योग्य कदम है। लेकिन नवीनतम उत्सर्जन मानदंडों का अनुपालन करने वाले नए वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का नतीजा अच्छा नहीं होगा। एनजीटी को आंकड़ों पर विचार कर चीजों का आकलन करना चाहिए। गोयनका ने कहा कि आइआइटी कानपुर की प्रकाशित होने वाली एक रपट में कहा गया है कि दिल्ली में कण प्रदूषण में सवारी वाहनों का योगदान चार फीसद है। इसमें भी करीब 85 फीसद योगदान भारत स्टेज-4 मानकयुक्त से पहले के वाहनों की वजह से है। इस तरह दिल्ली में कुल पीएम 2.5 में भारत स्टेज-4 के वाहनों का योगदान मात्र 0.5 फीसद है। क्या यही वजह है कि नए भारत स्टेज-4 वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है?

उन्होंने कहा कि डीजल वाहन ज्यादा पार्टिक्यूलेट का उत्सर्जन करते हैं जबकि सीएनजी वाहन ज्यादा एनओएक्स और पेट्रोल वाहन ज्यादा कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन करते हैं। राजधानी की आबोहवा बेहतर बनाने के लिए सिर्फ एक ईंधन पर ध्यान केंद्रित करना अनुचित है। क्यों न सब पर प्रतिबंध हो?

सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने कहा कि वाहन उद्योग आसान शिकार है। पिछले कई सालों में अदालतों ने हमसे जो भी करने को कहा, हमने किया। यदि हम समग्र योजना नहीं बनाते तो हमें कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि ध्यान सिर्फ कार पर ही क्यों हो क्योंकि बसें, ट्रक और पुराने वाहन भी हैं जिन्हें सड़क से हटाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वाहनों के आधुनिकीकरण नीति की जरूरत है।

हमें भारत स्टेज मानदंडों पर काम करने की जरूरत है ताकि इस मामले में तार्किकता के आधार पर विचार हो।
हुंदै मोटर इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (विपणन व बिक्री) राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि वाहन उद्योग ने पहले ही भारत स्टेज-5 के उत्सर्जन मानदंड के अनुरूप डीजल प्रौद्योगिकी में निवेश की योजना बनाई है जिसे 2019 में लागू किया जाना है। ऐसे फैसले का उद्योग पर नकारात्मक असर होता है। एनजीटी के आदेश पर प्राइस वाटर हाउसकूपर्स के भागीदारी अब्दुल मजीद ने कहा कि जो पहल हो सतत हों जिसमें वाहन समेत सभी उद्योग शामिल हों।

 

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