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जावा को लेकर आनंद महिंद्रा ने किया यह ऐलान, 90 साल बाद सच होगा मूल मलिक का सपना

क्लासिक लीजेंड्स के इन्वेस्टर अनुपम थरेजा ने कहा कि भले ही प्राग में लॉन्चिंग ब्रांड मजबूत होगा लेकिन गेरले की इच्छा को पूरा करना आसान नहीं था। थरेजा ने कहा कि हम इंतजार कर रहे थे और तब हमारे पास एक्सपोर्ट करने के लिए मोटरसाइकिल नहीं थी।

आनंद महिंद्रा की कंपनी में ही जावा मोटरसाइकिल तैयार होती हैं। (फाइल फोटो)

जावा मोटरसाइकिल एक बार फिर से अपने मूल देश चेक रिपब्लिक में दस्तक देने जा रही है। इसके साथ ही इस ब्रांड के मूल मालिक का 90 साल पुराना सपना भी पूरा होने जा रहा है।

दरअसल जावा मोटरसाइकिल के मालिक जीरी गेरले ने जब इस लीजेंडरी ब्रांड को बेचा था तो उन्होंने उस समय एक इच्छा जताई थी। गेरले चाहते थे कि उनका ब्रांड फिर से उनके देश चेक रिपब्लिक में बिके। उन्होंने उस समय उसे क्लासिक लीजेंड्स को बेचा था। बुधवार को महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने एक ट्वीट में लिखा, जावा के लिए जिंदगी का एक चक्कर पूरा हो गया है। जावा मोटरसाइकिल को प्राग में फ्रांटिसेक जेनेक ने बनाया था।

अब 90 साल बाद एक बाद फिर यह वहां की गलियों में दिखाई देगी। जेनेक ने 23 अक्टूबर 1929 में जावा बाइक का पहला मॉडल पेश किया था। क्लासिक लीजेंड्स के इन्वेस्टर अनुपम थरेजा ने कहा कि भले ही प्राग में लॉन्चिंग ब्रांड मजबूत होगा लेकिन गेरले की इच्छा को पूरा करना आसान नहीं था।

थरेजा ने कहा कि हम इंतजार कर रहे थे और हमारे पास एक्सपोर्ट करने के लिए मोटरसाइकिल नहीं थी। लेकिन जब एक चेक ब्रांड हो और एक ऐसा आदमी हो जो इस ब्रांड को लेकर बहुत नॉस्टेलेजिक हो और यह उसकी रगों में दौड़ता हो तो हमें यह करना ही था। गेरले ने इस ब्रांड को जिंदा रखा और लगातार आगे बढ़ाते रहे।

लंबे समय के अंतराल के बावजूद यह ब्रांड देश के बाइक लवर, इतिहासकारों और फोटोग्राफरों के दिमाग में अपनी जगह बनाए हुए है। मालूम हो कि क्लासिक लेजेंड्स में महिंद्रा की 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है, शेष 40 प्रतिशत हिस्सा क्लासिक लेजेंड्स के संस्थापक अनुपम थरेजा और रुस्तमजी समूह के अध्यक्ष और एमडी बोमन ईरानी के पास है।

मालूम हो कि जावा नाम जेनेक और वांडरर को पहले दो-दो अक्षरों को मिलाकर बना था। पहली जावा मोटरसाइकिल जावा ओएचवी थी। बाद में कंपनी ने मशहूर ब्रिटिश इंजीनियर जीडब्ल्यू पैचेट को अपने साथ जोड़ा। 1930 तक पैचेट जावा के चीफ डिजाइनर के रूप में कंपनी के साथ जुड़े रहे।

1933 में कंपनी का नया मॉडल जावा 175 चेकोस्लोवाकिया में सबसे लोकप्रिय मोटरसाइकिल बन चुका था। इसके परिणामस्वरूप, Jawa ने 500cc OHV का उत्पादन बंद कर दिया। 1961 में जावा ने भारत के मैसूर में फैक्ट्री लगाई। जावा-250 शहरी युवाओं की पसंदीदा बाइक बन गई।

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