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इस दिग्गज कारोबारी की कार से चलते थे महात्मा गांधी, खड़ी की थी देश में बड़ी ऑटो कंपनी, खूब बिकी थी गाड़ी

घनश्याम दास बिड़ला ने ही 1940 में हिंदुस्तान मोटर्स की स्थापना की थी और इस तरह ऑटोमोबाइल मार्केट में भी उतरे। यह भारत की पहली कार कंपनी थी। बता दें कि हिंदुस्तान मोटर्स ने ही भारत में बनी पहली कार अंबैसडर का निर्माण किया था।

Author Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: September 24, 2020 1:17 PM
mahatma gandhi carकई बार पैकार्ड 120 कार में सफर करते दिखे थे महात्मा गांधी

कार की बात करें तो भारत में आम लोगों के लिए आज भी यह लग्जरी है यानी हर किसी के बस का अफोर्ड कर पाना नहीं है। यही नहीं एक समय तो देश की दिग्गज हस्तियों के पास भी कार की नहीं थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कुछ तस्वीरों में कार से उतरते हुए या सवारी करते दिखते हैं, लेकिन बता दें कि ये कारें उनकी नहीं थीं। महात्मा गांधी अकसर Packard 120 कार में सफर करते थे। कहा जाता है कि इस कार के मालिक स्वतंत्रता सेनानी और उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला थे। उस दौर में देश में बहुत कम लोगों के पास ही कार थी। उनमें से एक व्यक्ति दिल्ली क्लॉथ ऐंड जनरल मिल्स के संस्थापक लाला श्री राम भी थे। उनके पास भी यही पैकार्ड 120 कार ही थी। भारत में कार के पहले मालिक टाटा ग्रुप के फाउंडर जमशेदजी टाटा थे।

पैकार्ड 120 सिडान कार के पिछले दरवाजे आज की तरह आगे की ओर नहीं खुलते थे बल्कि आगे से पीछे की ओर जाते थे। कार के अगले हिस्से में ही इंजन था, जिससे पिछले पहियों को रियर वील्स को पावर ट्रांसफर होती थी। पैकार्ड कार के मालिक घनश्याम दास बिड़ला देश के मशहूर बिड़ला ग्रुप के संस्थापक थे। आज बिड़ला ग्रुप का कारोबार भारत सहित कई देशों में फैला हुआ है। बिड़ला ग्रुप सीमेंट, एलुमिनियम, टेलिकॉम और फाइनेंशियल सर्विसेज के क्षेत्र में काम करता है।

बिड़ला ग्रुप के संस्थापक घनश्याम दास बिड़ला का जन्म 10 अप्रैल 1894 को राजस्थान के पिलानी में हुआ था। पहले विश्व युद्ध के दौरान घनश्याम दास बिड़ला बिजनेस में आ गए। बिड़ला को महात्मा गांधी का करीबी माना जाता था। बिड़ला ने पहले विश्व युद्ध के दौरान 1918 में कोलकाता में जूट मिल की स्थापना कर कारोबार की शुरुआत की‌ थी। इसके बाद बिड़ला ने बंबई में केशोराम कॉटन मिल की शुरुआत की, जिसे बाद में कलकता (कोलकाता) शिफ्ट कर दिया गया।

देश की पहली कार कंपनी भी की स्थापित: घनश्याम दास बिड़ला ने ही 1940 में हिंदुस्तान मोटर्स की स्थापना की थी और इस तरह ऑटोमोबाइल मार्केट में भी उतरे। यह भारत की पहली कार कंपनी थी। बता दें कि हिंदुस्तान मोटर्स ने ही भारत में बनी पहली कार अंबैसडर का निर्माण किया था। यह कार दशकों तक भारत में शान की सवारी मानी जाती थी। नेताओं और नौकरशाहों के बीच यह गाड़ी बेहद लोकप्रिय हुई थी। बिड़ला ग्रुप को वास्तविक ऊंचाईयां आजादी के बाद मिली जब बिड़ला ने यूरोपियन चाय, टेक्सटाईल और अन्य इंडस्ट्रीज में निवेश किया।

राष्ट्रवादी बिजनेसमैन कहे जाते थे बिड़ला: घनश्याम दास बिड़ला के अपने समय के राजनेताओं से करीबी संबंध थे। घनश्यामदास बिड़ला को आजादी की लड़ाई में भाग लेने के कारण ‘राष्ट्रवादी बिजनेसमैन’ भी कहा जाता है। घनश्याम दास बिड़ला ने आजादी के संघर्ष में आर्थिक मदद भी की थी। 1957 में श्याम दास बिड़ला को भारत विभूषण से नवाजा गया।

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