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तेलंगाना में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 75 पर्सेंट तक कटौती, महाराष्ट्र में दो टुकड़ों में मिलेगी मार्च की सैलरी, कोरोना लॉकडाउन के चलते राजस्व में कमी का दिया हवाला

महाराष्ट्र ने भी 60 फीसदी तक की कटौती का फैसला लिया था, लेकिन फिर इसे पलटते हुए मार्च में दो टुकड़ों में सैलरी देने की बात कही गई है। सूबे के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने यह बात कही है।

महाराष्ट्र और तेलंगाना में सरकारी कर्मचारियों को इस महीने कटकर मिलेगी सैलरी

कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन का असर बुरी तरह दिखने लगा है। तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की सरकार ने सैलरी में 75 पर्सेंट तक की कटौती का फैसला लिया है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र ने सैलरी दो हिस्सों में देने का फैसला लिया है। पहले महाराष्ट्र ने भी 60 फीसदी तक की कटौती का फैसला लिया था, लेकिन फिर इसे पलटते हुए मार्च में दो टुकड़ों में सैलरी देने की बात कही गई है। सूबे के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने यह बात कही है।

तेलंगाना सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, राज्य निगमों के मुखिया और स्थानीय निकायों के निर्वाचित पदाधिकारियों को मार्च महीने की सैलरी 75 फीसदी कटकर मिलेगी। इसके अलावा आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और अन्य केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों की सैलरी में 60 फीसदी की कटौती की जाएगी। इसके अलावा अन्य श्रेणिय़ों के कर्मचारियों की सैलरी 50 फीसदी कटकर मिलेगी।

चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों पर भी चली कैंची: मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की सरकार ने चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की सैलरी में भी कैंची चलाने का फैसला लिया है। इन कर्मचारियों को भी मार्च महीने की सैलरी 10 फीसदी कम मिलेगी। कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले और आउटसोर्स एंप्लॉयीज की सैलरी में भी 10 फीसदी की कटौती होगी।

महाराष्ट्र में दो टुकड़ों में मिलेगी सैलरी: अजित पवार के मुताबिक, ‘मार्च महीने में सैलरी में कोई कटौती नहीं की जाएगी। इसकी बजाय यह दो हिस्सों में दी जाएगी।’ फर्स्ट क्लास और सेकेंड क्लास एंप्लॉयीज को पहले हिस्से में आधी और फिर दूसरे हिस्से में आधी सैलरी मिलेगी। इसके अलावा थर्ड क्लास कर्मचारियों को पहले हिस्से में 75 फीसदी और दूसरे में 25 फीसदी वेतन मिलेगा। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों और पेंशनरों को एक बार में ही पूरी सैलरी मिलेगी।

तेलंगाना में विरोध में उतरी बीजेपी: तेलंगाना में इस कटौती का विरोध करते हुए विपक्षी दल बीजेपी ने कहा कि यह बेहद खराब फैसला है। बीजेपी ने कहा कि इस संकट की घड़ी में यह फैसला पूरी तरह से गलत है। आशंका जताई जा रही है कि तेलंगाना और महाराष्ट्र के इस ऐलान के बाद अन्य राज्य सरकारें भी राजस्व में कमी का हवाला देते हुए ऐसा फैसला ले सकती हैं।

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