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लॉकडाउन खत्म होने पर फैसला नहीं, अभी से होने लगी आटा, दाल, बिस्किट और नूडल्स जैसी जरूरी चीजों की किल्लत

लॉकडाउन के बाद बड़े पैमाने पर मजूदरों ने अपने गांवों की ओर पलायन कर लिया है। इसके चलते ज्यादातर एफएमसीजी कंपनियों में करीब 30 वर्कफोर्स के साथ ही काम चल रहा है।

लॉकडाउन खुलने का फैसला नहीं, लेकिन आटा-दाल की किल्लत अभी से

देश में लॉकडाउन खत्म होने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन उससे पहले ही आटा, दाल, नूडल्स, बिस्किट और स्नैक्स जैसी खान-पान की चीजों की सप्लाई में कमी देखने को मिल रही है। देश भर के रिटेल स्टोरों और किराना की दुकानों पर बढ़ी मांग के चलते इन चीजों की धड़ल्ले से बिक्री हुई है और पुराना स्टॉक लगभग खत्म हो गया है। इसके बाद नई आपूर्ति में कमी देखने को मिल रही है। दरअसल तेजी से बढ़ी मांग, फैक्ट्रियों में उत्पादन कम होने और ट्रांसपोर्ट सेवाओं के प्रभावित होने के चलते यह समस्या पैदा हुई है। मोर रिटेल के डेप्युटी एमडी मोहित कम्पानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, ‘आटे की सप्लाई कम है। इसके अलावा बिस्किट और नू़डल्स की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं है। सभी एफएमसीजी फर्म्स को ऐसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।’

इसके अलावा दालों की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन आपूर्ति में कमी देखने को मिल रही है। दरअसल इसकी वजह यह है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में करीब 75 फीसदी दाल मिलें लॉकडाउन के चलते बंद हैं। यही नहीं जिस माल का उत्पादन हो रहा है, वह भी रिटेल स्टोरों तक नहीं पहुंच पा रहा है क्योंकि देश भर में ट्रांसपोर्ट की समस्या देखने को मिल रही है। लोकप्रिय नूडल्स मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले ने पिछले महीने के अंत में ही कहा था कि कई जगहों पर उसका उत्पादन बंद हो गया है या फिर बेहद कम हो गया है। इसी तरह ब्रिटानिया, पेप्सी, आईटीसी और पार्ले जैसी एफएमसीजी कंपनियों को भी उत्पादन जारी रखने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

मजदूरों के पलायन ने भी बढ़ा दी समस्या: दरअसल लॉकडाउन के बाद बड़े पैमाने पर मजूदरों ने अपने गांवों की ओर पलायन कर लिया है। इसके चलते ज्यादातर एफएमसीजी कंपनियों में करीब 30 वर्कफोर्स के साथ ही काम चल रहा है। इसके अलावा कई राज्यों में सरकारों की ओर से ही मैन्युफैक्चिंग पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में चिप्स एवं अन्य स्नैक्स के उत्पादन में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

कई राज्यों में रोक से भी उत्पादन पर असर: इन सभी चीजों को जरूरी श्रेणी में रखा गया है, इसके बावजूद कई राज्यों में इन पर बंदिशें लगाने के मामले सामने आए हैं। गौरतलब है कि सरकार ने ऐसे इलाकों में भी दूध, दवा एवं अन्य जरूरी चीजों की सप्लाई पर रोक नहीं लगाई है, जिन्हें कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट माना जा रहा है। हालांकि इसके बाद भी पुलिस की ओर से गैर-जरूरी रोक लगाने के मामले सामने आए हैं।

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