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Lipstick effect के दौर से गुजर रही भारतीय अर्थव्यवस्था, मंदी में भी बढ़ रहा फिल्मों का कलेक्शन, जानिए- क्या कहती है अर्थशास्त्र की परिभाषा

Movies collection increased: 'लिपस्टिक इफेक्ट' से आशय अर्थव्यवस्था की उस स्थिति से है, जहां लोग छोटी-छोटी सुविधाओं और लग्जरी पर खर्च जारी रखते हैं। ऐसी स्थिति कई बार मंदी के दौर में भी देखी जाती है। इसे ही अर्थशास्त्र की परिभाषा में 'लिपस्टिक इफेक्ट' कहा गया है।

Author Edited By सूर्य प्रकाश नई दिल्ली | Published on: February 19, 2020 2:05 PM
जानिए क्या होता है अर्थव्यवस्था पर lipstick effect

Lipstick effect on economy: भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था कई सेक्टर्स में मंदी के दौर से जूझ रही है, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री एक ऐसा सेक्टर है, जिसमें उछाल देखने को मिली है। फिल्म देखने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। मंगलवार को रेटिंग एजेंसी CARE Ratings ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र करते हुए कहा कि यह अर्थव्यवस्था पर ‘लिपस्टिक इफेक्ट’ है। सुनने में यह भले ही अजीब लगे, लेकिन कोबरा इफेक्ट की तरह ही यह भी अर्थव्यवस्था का ही एक सिद्धांत है।

‘लिपस्टिक इफेक्ट’ से आशय अर्थव्यवस्था की उस स्थिति से है, जहां लोग छोटी-छोटी सुविधाओं और लग्जरी पर खर्च जारी रखते हैं। ऐसी स्थिति कई बार मंदी के दौर में भी देखी जाती है। इसे ही अर्थशास्त्र की परिभाषा में  ‘लिपस्टिक इफेक्ट’ कहा गया है। सिद्धांत के मुताबिक यह वह दौर होता है, जब महिलाएं घरेलू जरूरतों के लिए कोई बड़ा सामान तो नहीं खरीदतीं, लेकिन लिपस्टिक जैसी चीजों को ऊंची कीमतों पर भी खरीदती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस इफेक्ट का ही असर है कि आर्थिक सुस्ती के दौर में भी लोग फिल्में देखने जा रहे हैं। बता दें कि केंद्र सरकार के एक मंत्री भी विवादित बयान देते हुए कहा था कि फिल्में देखने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है, फिर मंदी कैसे कही जा सकती है।

मंदी में कैसे काम करता है लिपस्टिक इफेक्ट: इस इफेक्ट के दौरान एफएमसीजी सेक्टर में भी अकसर ग्रोथ की स्थिति बनी रहती है। इसकी वजह यह है कि भले ही कितनी भी मंदी की स्थिति हो लोग खान-पान की चीजों पर खर्च को नहीं रोकते। पिछले ही दिनों एफएमसीजी कंपनियों ने अपने डेटा में ग्रोथ दर्ज की थी। इन कंपनियों में हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड, मारिको और पारले जैसी कंपनियां शामिल थीं।

जीएसटी कम होने के चलते बढ़ा कलेक्शन: इसके अलावा फिल्में देखने का आंकड़ा बढ़ने की वजह जीएसटी में कटौती और बेहतर फिल्मों की उपलब्धता भी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2018 में जीएसटी की दरों में कटौती के चलते मूवी टिकट सस्ते हुए हैं और इससे सिनेप्रेमियों में थोड़ा उत्साह बढ़ा है। बता दें कि मूवी टिकटों पर जीएसटी की नई दरों के तहत 100 रुपये से ज्यादा की कीमत पर 18 फीसदी और 100 रुपये से कम के टिकट पर 12 पर्सेंट टैक्स लग रहा है। भारत के मीडिया और मनोरंजन सेक्टर के रेवेन्यू की बात की जाए तो फिल्म जगत की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।

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