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एलआईसी की हिस्सेदारी बेचने को मार्च तक आईपीओ लाएगी सरकार, विनिवेश का टारगेट कम रहने पर लिया फैसला

सरकार एलआईसी में 100 फीसदी की हिस्सेदारी रखती है और सेबी के नियमों के मुताबिक कम से कम 25 पर्सेंट पब्लिक शेयर होल्डिंग होनी चाहिए। हालांकि सरकार एक बार में कितने का आईपीओ लाएगी, यह कंपनी के वैल्यूएशन पर निर्भर करेगा।

life insuranceभारतीय जीवन बीमा निगम का आईपीओ लाने की तैयारी में मोदी सरकार

केंद्र सरकार की ओर से मार्च 2021 तक एलआईसी का आईपीओ पेश किया जा सकता है। देश की एकमात्र सरकारी बीमा कंपनी की सरकार 25 फीसदी हिस्सेदारी आईपीओ के जरिए बेचने की तैयारी में है। डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट ऐंड पब्लिस एसेट मैनेजमेंट के सेक्रेटरी तुहीन कांत पांडेय ने कहा कि निसंदेह अगले वित्त वर्ष की शुरुआत तipक आईपीओ आ गया। हालांकि हम इसे मार्च से पहले की लाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि यह बात सही है कि हमने कोरोना संकट के चलते बड़ा वक्त गंवा दिया है। उन्होंने कहा कि एलआईसी एक बड़ी कंपनी और इसका आईपीओ लाने के लिए बड़ी तैयारी किए जाने की जरूरत है।

एलआईसी का आईपीओ लाने में देरी के कारणों का जिक्र करते हुए तुहीन कांत पांडेय ने कहा कि एलआईसी ऐक्ट के चलते सरकारी बीमा कंपनी को कई मामलों में छूट हासिल थी। उदाहरण के तौर पर एलआईसी को एम्बेडेड वैल्यू की रिपोर्टिंग की छूट थी, लेकिन यदि कंपनी का आईपीओ लाना है तो फिर उसकी जरूरत है। ऐसे में सरकार को एआआईसी का आईपीओ लाने के लिए ऐक्ट में परिवर्तन करना होगा। इसके लिए पार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट ऐंड पब्लिस एसेट मैनेजमेंट की ओर से डीएफएस के साथ बातचीत की जा रही है। पांडे ने कहा कि एलआईसी का आईपीओ लाने से पहले ऐक्ट में परिवर्तन की जरूरत होगी और उसके बिना यह काम नहीं हो सकेगा।

बता दें सरकार एलआईसी में 100 फीसदी की हिस्सेदारी रखती है और सेबी के नियमों के मुताबिक कम से कम 25 पर्सेंट पब्लिक शेयर होल्डिंग होनी चाहिए। हालांकि सरकार एक बार में कितने का आईपीओ लाएगी, यह कंपनी के वैल्यूएशन पर निर्भर करेगा। यदि कंपनी की वैल्यूएशन काफी ज्यादा होती है तो सरकार की ओर से दो किस्तों में आईपीओ लाया जा सकता है। पहले राउंड में 10 फीसदी का आईपीओ आ सकता है और दूसरी बार में 15 फीसदी का आईपीओ लाया जा सकता है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में 2.1 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश जुटाने का फैसला लिया था, लेकिन अब तक सरकार इस टारगेट से काफी पीछे है। मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती छह महीनों में सरकार सिर्फ 5,000 करोड़ रुपये का निवेश ही जुटा सकी है।

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