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LIC का आईपीओ आने में हो सकती है देरी, बड़ी रकम जुटाने के सरकार के प्लान को लग सकता है झटका

सरकार ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 2.1 लाख करोड़ रुपये की रकम विनिवेश से जुटाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन एलआईसी का आईपीओ न आने के चलते यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये पर ही अटक सकता है।

narendra modi pakistan viral videoपीएम नरेंद्र मोदी।

सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी की हिस्सेदारी बेचने से सरकार को बड़ी रकम मिलने की उम्मीद है। लेकिन एलआईसी का आईपीओ आने की प्रक्रिया मौजूदा वित्त वर्ष में पूरी होनी मुश्किल है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक धीमी तैयारियों और औपचारिकताओं को पूरा करने में देरी होने के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। सरकार एलआईसी की 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए आईपीओ लाने की तैयारी में है। हालांकि शुरुआती दौर में 10 फीसदी का ही आईपीओ लाया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार पहले 10 फीसदी का ही आईपीओ लाने की तैयारी कर रही थी, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़ाकर 25 पर्सेंट तक करने पर विचार किया जा रहा है।

दरअसल सरकार ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 2.1 लाख करोड़ रुपये की रकम विनिवेश से जुटाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन एलआईसी का आईपीओ न आने के चलते यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये पर ही अटक सकता है। एलआईसी के अलावा बीपीसीएल की हिस्सेदारी को बेचने की प्रक्रिया भी धीमी चल रही है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि 31 मार्च तक कंपनी का निजीकरण किया जा सकता है। हाल ही में डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव में एलआईसी ऐक्ट में संशोधन की बात कही गई है ताकि 25 पर्सेंट हिस्सेदारी बेची जा सके। प्रस्ताव के मुताबिक पहले राउंड में एलआईसी के 5 से 10 पर्सेंट तक की हिस्सेदारी का आईपीओ लाया जा सकता है। यह आईपीओ मार्केट के हालात को ध्यान में रखते हुए लाया जाएगा।

हालांकि एक वरिष्ठ सरकारी अफसर ने बताया कि अगले 6 महीनों में एलआईसी का आईपीओ आना मुश्किल है क्योंकि अभी बहुत सी तैयारियां किया जाना बाकी है। आमतौर पर आईपीओ लाने की तैयारी में 6 से 9 महीने तक का वक्त लगता है। इसके अलावा एलआईसी ऐक्ट में तब्दीली के लिए भी वक्त चाहिए और फिर आईपीओ लाने की भी तैयारी की जानी है। ऐसे में इस प्रक्रिया में देरी होना तय माना जा रहा है। एलआईसी ऐक्ट के मुताबिक कंपनी अपने सरप्लस का 95 फीसदी हिस्सा पॉलिसी होल्डर्स को देती है, जबकि 5 फीसदी रकम सरकार को दी जाती है।

सूत्रों के मुताबिक एलआईसी ऐक्ट में संशोधन का बिल संसद में दिसंबर महीने में पेश किया जा सकता है। जानकारों के मुताबिक सरकार को एलआईसी की 10 पर्सेंट तक हिस्सेदारी बेचने से 80,000 करोड़ से लेकर 1.10 लाख करोड़ रुपये तक की रकम मिल सकती है। इस तरह से देखें तो 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर सरकार 2.5 लाख करोड़ रुपये तक की रकम हासिल कर सकती है। प्राइवेट वैल्यूएशन फर्म आरबीएसए अडवाइजर्स के अनुमान के मुताबिक एलआईसी की कुल वैल्यूएशन 9.9 से 11.5 लाख करोड़ रुपये के करीब है।

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