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आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए बिहार में क़ानून का शासन जरूरी: हामिद अंसारी

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘हरियाणा और गोवा जैसे राज्यों ने बिहार को पीछे छोड़ दिया है। बिहार में अभी भी प्रति व्यक्ति आय का स्तर देश में सबसे कम है।

Author पटना | Updated: September 9, 2016 8:40 PM
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी (फाइल फोटो)

बिहार में पिछले दशक में 10.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने शुक्रवार (9 सितंबर) को कहा कि आर्थिक वृद्धि तथा विदेशी निवेश आकर्षित करने के वास्ते उपयुक्त माहौल बनाने को कानून का शासन एक जरूरी पूर्व शर्त है। बिहार चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री की 90वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘राज्य अगर विकसित राज्यों की कतार में शामिल होना चाहता है तो उसे आर्थिक वृद्धि दर को बढ़ाने तथा अगले दो दशक तक इस तीव्र वृद्धि को बनाये रखने की आवश्यकता होगी।’

बिहार की 10वीं आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट 2015-16 का हवाला देते हुए अंसारी ने कहा कि राज्य में पिछले दशक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और विनिर्माण, निर्माण, बीमा तथा बैंक जैसे कुछ क्षेत्रों में इस दौरान 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि इस दौरान बिहार में प्रति व्यक्ति आय 7,914 रुपए से बढ़कर 15,640 रुपए हो गई तथा देश की अर्थव्यवस्था में इसका योगदान 2.6 प्रतिशत से बढ़कर 3.3 प्रतिशत हो गया। अंसारी ने कहा कि ये आंकड़े प्रभावी हैं लेकिन इन्हें राज्य की अर्थव्यवस्था के आधार को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिये।

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘हरियाणा और गोवा जैसे राज्यों ने बिहार को पीछे छोड़ दिया है। बिहार में अभी भी प्रति व्यक्ति आय का स्तर देश में सबसे कम है और इस मामले में वह मध्य प्रदेश से 10 साल तथा अखिल भारतीय स्तर पर 15 साल पीछे है।’ उन्होंने कहा, ‘सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था 2014-15 में 14वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। वर्ष 2004-05 में बिहार 15वें स्थान पर था। इस प्रकार इस मामले में एक पायदान का सुधार हुआ।’

हामिद अंसारी ने कानून के शासन पर जोर देते हुये कहा, ‘इसका मकसद तानाशाही वाले कानून से बचना या तानाशाही रूप से उसके क्रियान्वयन से बचना है, उच्चतम न्यायालय ने समानता लाने के लिये कानून के शासन को सामाजिक न्याय का एक प्रभावी जरिया करार दिया है।’ उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘अत: तीव्र वृद्धि के लिये निवेश आकर्षित करने को लेकर कानून एवं व्यवस्था को बनाये रखना जरूरी है। बिहार को ऐसा माहौल सृजित करना है जहां ज्यादा-से-ज्यादा कंपनियां बिहार को देश के पूर्वी भाग में उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए ‘गेटवे’ के रूप में देखें। ऐसी जगह के रूप में देखें जहां पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की बेहतर उपलब्धता के साथ संयंत्र लगाने की लागत भी प्रतिस्पर्धी हो।’

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