टाटा सुपरऐप की लांचिंग टली, जान‍िए क्‍या बताई वजह

इस महीने के अंत में टाटा डिजिटल के सुपर ऐप को लांच किया जाना था। ताकि फेस्टिव सीजन में पहले से मौजूद अमेजन, वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट और अरबपति मुकेश अंबानी-नियंत्रित रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) जैसे कट्टर प्रतिद्वंद्वियों को टक्‍कर दी जा सके।

tata Super App
टाटा के इस सुपर ऐप में सभी तरह की सुविधाएं मिलेगी। जिसमें इंटरटेंमेंट से लेकर खाने पीने का सामान अवेलेबल होगा। (Photo By Reuters)

110 अरब डॉलर से अधिक के टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने सुपर ऐप लांच‍िंग से अपने हाथ खींच लिए हैं। ग्रुप के अनुसार वह पहले कंज्‍यूमर प्रोटेक्‍शन रूल्‍स पर स्पष्टता चाहता है। मुंबई स्थित कार-टू-कॉफी समूह का ऑल-इन-वन ई-कॉमर्स ऐप एक ही छतरी के नीचे कई सेवाओं और उत्पादों लेकर आएगा। जिसमें उपभोक्ता के लिए टिकाऊ वस्तुएं, फूड और ग्रोसरी और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं।

इस महीने के अंत में होना था लांच
इस महीने के अंत में टाटा डिजिटल के सुपर ऐप को लांच किया जाना था। ताकि फेस्टिव सीजन में पहले से मौजूद अमेजन, वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट और अरबपति मुकेश अंबानी-नियंत्रित रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) जैसे कट्टर प्रतिद्वंद्वियों को टक्‍कर दी जा सके। आपको बता दें क‍ि सुपर ऐप की टेस्टिंग बेंगलुरु में उपयोगकर्ता समूह के बीच में किया गया था। जोकि किसी के संपर्क में नहीं थे।

कंज्‍यूमर प्रोटेक्‍शन रूल्‍स आया आगे
जानकारों की मानें तो प्रस्तावित उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 ने टाटा डिजिटल की सुपर ऐप पॉलिसीज को काफी प्रभावित किया है। क्योंकि यह एक ई-कॉमर्स इकाई है, और एक सुपर ऐप को ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस माना जाएगा। टाटा का सुपर ऐप कई समूह कंपनियों द्वारा दी जाने वाली संयुक्त वस्तुओं और सेवाएं प्राप्त करने पर आधारित है। प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, किसी ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस की संबंधित पार्टी या संबद्ध फर्म, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मार्केटप्लेस से जुड़ी हुई है, को प्लेटफॉर्म पर विक्रेता के रूप में अनुमति नहीं दी जाएगी।

मांगी गई थी प्रति‍क्रिया
जुलाई में, वाणिज्य मंत्रालय ने ड्राफ्ट रूल्‍स पर प्रतिक्रिया मांगी थी क्योंकि वह स्थानीय खुदरा विक्रेताओं को अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन खुदरा बाज़ार से बचाना चाहता था। यह उन स्थानीय फर्मों की योजनाओं को प्रभावित कर सकता है जो ई-कॉमर्स सेक्‍टर में प्रवेश करना चाहती हैं।

पहले नियम हो जाएं स्‍पष्‍ट
आरआईएल के अधिकारियों का मानना है कि कंपनी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बजाय रिटेलर के रूप में काम करती है और अगर प्रस्तावित नियमों को लागू किया जाता है तो वह जियो प्लेटफॉर्म की मार्केटप्लेस योजनाओं पर फिर से काम करने के लिए तैयार है। टाटा डिजिटल टीम नियमों के अनुसार व्यापार संरचना पर स्पष्टता प्राप्त होने तक इंतजार करेगी। इसे लांच करने और मॉडल पर फिर से काम करने का कोई मतलब नहीं है।

इन कंपन‍ियों को कर चुकी हैं टेकओवर
कंपनी के अनुसार ऐप काफी हद तक शेप में है और चीजें स्पष्ट होने के बाद यह जमीन पर उतर जाएगी। आपको बता दें क‍ि टाटा डिजिटल ने अपनी सुपर ऐप सेवाओं को बनाने के लिए ई-कॉमर्स स्टार्टअप जैसे 1एमजी और बिगबास्‍केट में नियंत्रण हिस्सेदारी हासिल कर ली है।

टाटा खरीदा मुंबई में आईटी पार्क
टाटा रियल्टी ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड ने जानकारी दी है कि मुंबई के गोरेगांव क्षेत्र में इंटेलियन स्क्वायर आईटी पार्क में ब्रिटेन के पीई फंड ऐक्टिस की पूरी हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर लिया है। कंपनी ने इस पूरी डील की वैल्‍यू के बारे में जानकारी नहीं दी है। वैसे इस पूरी डील की वैल्‍यू 2600 करोड़ रुपए बताई जा रही है। ऐक्टिस की इस प्रॉपर्टी में 26 फीसदी हिस्सेदारी है। यह प्रॉपर्टी टाटा रियल्टी और ऐक्टिस के ज्‍वाइंट वेंचर हिस्‍सा थी। इस डील के बाइ टीआरआईएल की हिस्सेदारी बढ़कर अब 100 फीसदी हो गई है।

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