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अंबानी-बिड़ला के मंसूबों पर भारी पड़ा था यह कारोबारी, L&T के नाइक ने सुनाई पूरी कहानी

टेकओवर की कोशिशों के दौरान नाइक ने अपने कर्मचारियों को भी समझाया कि यदि हम सब कंपनी के मालिक रहेंगे तो कोई भी बाहर का व्यक्ति दोबारा कंपनी को खरीदने की कोशिश नहीं करेगा।

Author November 20, 2017 1:38 PM
अंबानी, बिड़ला समेत कई कारपोरेट की तरफ से हो रही टेकओवर की कोशिशों से कंपनी को बेहद मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा था।

देश की बड़ी इंजीनियरिंग फर्म लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के गैर-कार्यकारी चेयरमैन ए एम नाइक की जीवनी दि नेशनलिस्ट मार्केट में आ गई है। बुक लॉन्च प्रोग्राम में अनिल एम नाइक ने एलएंडटी के कारोबार को तीन चरणों में बांटने की बातों को भी याद किया। इसके आधार पर यह इंजीनियरिंग, विनिर्माण और परियोजना क्रियान्वयन के क्षेत्रों में टॉप कंपनी बनकर उभरी। किताब में बताया गया है कि नाइक ने किस तरह अंबानी और बिडला द्वारा एलएंडटी के अधिग्रण के प्रयासों को विफल किया। उस समय कंपनी लगभग उनके हाथ से फिसल चुकी थी। दि नेशनलिस्ट को मिनहाज मर्चेंट ने लिखा है।

नाइक ने बाताया कि अंबानी, बिड़ला समेत कई कारपोरेट की तरफ से हो रही टेकओवर की कोशिशों से कंपनी को बेहद मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा था। ऐसे में नाइक ने अपने कर्मचारियों को भी समझाया कि यदि हम सब इसके मालिक रहेंगे तो कोई भी बाहर का व्यक्ति दोबारा कंपनी को खरीदने की कोशिश नहीं करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने भी यह प्रस्ताव रखा। महीनों तक चली चर्चा के बाद एलएंडटी के कर्मचारियों के ट्रस्ट ने बिड़ला की पूरी हिस्सेदारी खरीद ली और बिड़ला को बाहर का रास्ता दिखाया।

नाइक ने बताया कि अंबानी की टेकओवर की कोशिशें बेहद गंभीर थीं, लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि एलएंडटी के तत्कालीन चेयरमैन एनएम देसाई और अंबानी के बीच क्या बातचीत हुई थी। इस तरह की सभी बातचीत देसाई और अन्य 5-6 लोगों तक सीमित थीं। नाइक उस समय बोर्ड में भी नहीं थे। नाइक के मुताबिक अंबानी कंपनी को छाबड़िया से बचाने के लिए आए थे। धीरूभाई एलएंडटी के अधिग्रहण की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने अपने दोनों बेटों (मुकेश और अनिल) को भी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में जगह दिला दी। एलएंडटी बोर्ड इस बात को भांप रहा था कि अंबानी कंपनी पर पूरा होल्ड चाहते हैं।

उस समय एलएंडटी में धीरूभाई की स्थिति इतनी मजबूत हो गई थी कि उन्होंने कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम पर बाजार से करोड़ों रुपए भी उठा लिए थे। तब तक कंपनी में अंबानी की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 19 फीसदी तक हो चुकी थी, लेकिन 1989 में राजनीतिक परिदृश्य इस तरह बदला कि धीरूभाई के हाथ से यह मौका भी निकल गया। इस बार एलआईसी (उस वक्त की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर) आगे आई और उसकी पहल पर अंबानी को एलएंडटी से बाहर जाना पड़ा।

लारसन एंड टूब्रो के नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन एएम नाइक को मुकेश अंबानी पहला और असली मेक इन इंडिया मैन मानते हैं। रिलायंस इंड्स्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने नाइक की बायॉग्रफी ‘दि नेशनलिस्ट’ की लॉन्चिंग पर यह बात कही। बायॉग्राफी में नाइक के लारसन ऐंड टूब्रो में 53 सालों के सफर को बताया गया है।

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