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वर्ष 2013 का भूमि कानून सख्त, राज्य अपने अलग कानून बनाएं

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढिया ने कहा कि वर्ष 2013 का भूमि कानून सख्त और राज्य तमिलनाडु की तर्ज पर अपने अलग कानून बनाएं..

Author नई दिल्ली | September 11, 2015 00:42 am

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढिया ने राज्यों को सलाह दी है कि वे तमिलनाडु की तर्ज पर अपनी जरूरतों के हिसाब से अपने भूमि अधिग्रहण कानून बनाने में तमिलनाडु मॉडल का पालन करें। उन्होंने मौजूदा भूमि अधिग्रहण कानून (2013) को ‘थोड़ा सख्त’ करार दिया है।

पनगढिया ने टीवी चैनल सीएनबीसी टीवी18 को दिये गए साक्षात्कार में कहा,‘तमिलनाडु में एक अलग कानून या संशोधित कानून पांच जनवरी 2015 से लागू है। लगभग 7-8 महीने हो चुके हैं और बहुत कम लोगों को ही इसकी जानकारी है। वास्तव में तमिलनाडु ने 2013 (भूमि) कानून को संशोधित कर अपने यहां लागू किया है।’

इस कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और ‘अन्य राज्य भी इसी रणनीति का पालन कर सकते हैं।’
पनगढिया ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून,2013 थोड़ा सख्त है और उन्होंने नीति आयोग में कार्यभार संभालने से पहले भी सरकार को यही राय दी थी।

उन्होंने कहा,‘नीति आयोग में आने से पहले से ही मेरी यह मजबूत राय रही है कि भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 थोड़ा सख्त कानून है क्योंकि लोकहित वाले महत्वपूर्ण मामलों में भी भूमि अधिग्रहण में कम से कम चार पांच साल का समय लगेगा।’

पनगढिया का यह बयान इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है कि भूमि अधिग्रहण कानून के राजग सरकार के प्रयासों को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा है। पहले, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी राज्यों को सलाह दी थी कि वे अपने भूमि कानून, केंद्र की सहमति से बनाएं।’

उन्होंने कहा कि अन्य राज्य भी तमिलनाडु मॉडल का अनुपालन कर सकते हैं लेकिन उन्हें राष्ट्रपति की सहमति के लिए केंद्र सरकार के पास आना पड़ेगा। लेकिन चूंकि एक राज्य को मंजूरी दी जा चुकी है तो ‘मुझे नहीं लगता कि केंद्र सरकार अन्य राज्य को उसी चीज से इनकार कर सकती है।’

पनगढिया ने कहा कि उन्होंने भूमि अधिग्रहण विधेयक पर राजस्थान व महाराष्ट्र को भी सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अलग अलग राज्य में अलग अलग भूमि अधिग्रहण कानून का विचार इस साल जुलाई में नीति आयोग की संचालन परिषद में मुख्यमंत्रियों की बैठक में सामने आया था।

उन्होंने कहा कि जब तमिलनाडु के भूमि विधेयक को मंजूरी मिल गयी है तो ‘‘मेरा अनुमान है कि केंद्र दूसरे राज्यों को इस तरह की मंजूरी से इनकार नहीं करेगा।

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