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लॉकडाउन से मजदूरों को राहत, योग्यता के मुताबिक आज से मिलेगा काम, बस अपने राज्य जाने की अनुमति नहीं

सरकार ने स्थानीय प्रशासन से यह भी कहा है कि वह रिलीफ कैंपों में मौजूद मजदूरों का डेटा तैयार करे और उनकी स्किल के बारे में पता लगाए। इसके बाद उन्हें उनकी योग्यता के मुताबिक ही काम देने पर विचार किया जाएगा।

सरकार दावा कर रही है कि इस पूर्णबंदी में भी वह मनरेगा द्वारा मजदूरों को काम दे रही है।

कोरोना के लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने कहा कि वे जहां भी हैं, वहां मजदूरी कर सकते हैं। हालांकि उन्हें अपने गृह राज्य जाने या फिर अन्य किसी राज्य में मूवमेंट करने की इजाजत नहीं होगी। केंद्र सरकार की ओर से रविवार को कहा गया है कि रिलीफ कैंपों में फंसे मजदूर जहां हैं, उन्हें वहीं काम मिल सकता है। वे उस राज्य में मूवमेंट कर सकते हैं, जहां बसे हैं। लेकिन यदि वे दूसरे राज्य के रहने वाले हैं तो उन्हें अपने घर जाने की अभी अनुमति नहीं दी जाएगी। गृह मंत्रालय की ओर से मजदूरों के लिए जारी ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम फॉर मूवमेंट ऑफ स्ट्रेंडड लेबर’ के तहत यह छूट दी गई है। हालांकि यह छूट भी उन्हीं इलाकों के लिए है, जिन्हें हॉटस्पॉट घोषित नहीं किया गया है।

सरकार की ओर से 20 अप्रैल से देश भर में कुछ कारोबारी गतिविधियों और मूवमेंट पर छूट दी गई है। इसी के तहत मजदूरों को भी यह राहत देने का फैसला लिया गया है। यही नहीं सरकार ने स्थानीय प्रशासन से यह भी कहा है कि वह रिलीफ कैंपों में मौजूद मजदूरों का डेटा तैयार करे और उनकी स्किल के बारे में पता लगाए। इसके बाद उन्हें उनकी योग्यता के मुताबिक ही काम देने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा यदि मजदूर अपने ही राज्य में कहीं मौजूद हैं तो फिर उनकी स्क्रीनिंग के बाद उन्हें अपने घरों के लिए जाने दिया जा सकता है। हालांकि इस बीच देश के कई राज्यों में अब भी कोरोना वायरस के मामले थमते नजर नहीं आ रहे हैं।

दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक में लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि गोवा जैसे कुछ राज्यों से उम्मीद बंधी है, जहां बीते कुछ दिनों में कोई केस देखने को नहीं मिला है। गृह मंत्रालय ने अपने नोटिफिकेशन में स्पष्ट तौर पर कहा है कि एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच मजदूरों का मूवमेंट नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि पिछले दिनों राजस्थान के कोटा शहर से छात्रों को लाने के लिए यूपी सरकार की ओर से बसों को भेजा गया था। इस पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि यह नियमों का उल्लंघन है और यदि छात्रों को लाया जा सकता है तो फिर मजदूरों को ही क्यों छोड़ा जाए।

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