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खादी ने कताई करने वालों की बढ़ाई मज़दूरी

यह बढ़ोत्तरी एक अप्रैल से लागू हो चुकी है और सभी राज्य एवं मंडलीय कार्यालयों को इसे लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: August 20, 2016 10:57 PM
कपड़े सिलाने के लिए दर्जी को शरीर का नााप देता एक व्यक्ति। (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।)

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने सूती धागे की कताई करने वालों की मजदूरी चार रुपए से बढ़ाकर साढ़े पांच रुपए प्रति लच्छा कर दी है। कपड़ा क्षेत्र में लच्छा से तात्पर्य धागे के एक गुच्छे से होता है जो कि गोल घेरे के आकार में होता है। आयोग के चेयरमैन वी. के. सक्सेना ने एक बयान में कहा, ‘आयोग ने सूत कातने वालों (स्पिनर्स) का मेहनताना चार रुपए प्रति लच्छे से करीब 37.5 प्रतिशत बढ़ाकर साढ़े पांच रुपए प्रति लच्छा कर दिया है।’ उन्होंने बताया कि यह बढ़ोत्तरी एक अप्रैल से लागू हो चुकी है और सभी राज्य एवं मंडलीय कार्यालयों को इसे लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

सक्सेना ने कहा कि इस वृद्धि के साथ कताई करने वालों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त बाजार विकास सहायता भी मिलेगी इस प्रकार उनका प्रतिदिन का मेहनताना पहले के 90 रुपए से बढ़कर 190 रुपए प्रतिदिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग ने दस्ताकारों की कमाई बढ़ाने के लिए महंगे उत्पादों पर 50 रुपए का अतिरिक्त शुल्क लगाने का भी निर्णय किया है।

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