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जानिए कैसा हो सैलरी स्ट्रक्चर ताकी मिल सके टैक्स में ज्यादा छूट और हो सके बेहतर बचत

अपनी सैलरी का स्ट्रक्चर खुद तैयार कर आप टैक्स में रियायत पा सकते हैं और कर सकते हैं अच्छी सेविंग्स, जानते हैं इसके बारे में।

इससे पहले ईपीएफओ ने अपने अंशधारकों को 50 हजार रुपये का अलग से वित्तीय लाभ दिए जाने का ऐलान किया था। (संकेतात्मक तस्वीर)

नौकरी पेशा लोगों के लिए बचता करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में आप कैसे अपनी सैलरी का स्ट्रक्चर तैयार कर टैक्स में रियायत पा सकते हैं, जानते हैं इसके बारे में।

एचआरए- रेंट पर रह रहे नौकरीपेशा लोग एचआरए क्लेम्स करके अपने टैक्स में छूट पा सकते हैं। एचआरए आंशिक रूप से टैक्स से बाहर होता है। वहीं आप अपने इंकम टैक्स पर भी एचआरए और होम लोन पेमेंट के जरिए छूट की मांग कर सकते हैं। वहीं अगर आप किराए पर रह रहे हैं और होम लोन की किस्त भी दे रहे हैं तब भी आप टैक्स बेनिफिट के लिए क्लेम कर सकते हैं।

एनपीएस- नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत सभी इप्लोइज का इसमें योगदान टैक्सेबल होता है। वहीं इसमें बेसिक सैलरी का 10% तक का योगदान सेक्शन 80CCD (2) के तहत टैक्सिबल होता है। वहीं इसके साथ सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये और 50 हजार रुपये के योगदान पर भी टैक्स से छूट मिलती है।

पैसे की वापसी (Reimbursements)- अगर आप अपने इप्लोयर से तय किए गए बिलों का भुगतान या Reimbursements लेते हैं तो यह भी टैक्स बचाने में आपकी मदद करता है। Reimbursement आप फोन, ट्रैवल, फूड के बिलों पर क्लेम कर सकते हैं। वहीं किन खर्चों पर पैसे की वापसी मिलेगी यह कंपनियां अमूमन अलग-अलग तरीकों से तय करती है।

बोनस- आपको मिलने वाला बोनस टैक्सिबल होता है और अमूमन सभी कंपनियां टैक्स काटकर ही बोनस देती है। ऐसे में आप अपनी टैक्स सेविंग की जानकारी इंप्लॉयर को देकर ज्यादा से ज्यादा बोनस अपने हाथ में रख सकते हैं। अगर ऐसा नहीं करते तो आपको आटीआर भरने के दौरान टैक्स रिफंड क्लेम करना होगा।

एलटीए- लीव ट्रेवल allowance आपकी सैलरी का हिस्सा होता है जिसे आप टैक्स बचाने के लिए यूज कर सकते हैं। यह सिर्फ भारत में ही होने वाली यात्राओं पर दिया जाता है और अमूमन इसकी लीमिट 4 साल में दो यात्राओं की होती है।

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