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I-T रिटर्न्स भरते हुए रखेंगे इन 5 बातों का खास ख्याल तो हमेशा रहेंगे फायदे में

जानिए आईटीआर और रिवाइस्ड आईटीआर फाइल करते समय ध्यान में रखने वाली जरूरी बातें।

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वित्त वर्ष 2016-17 के खत्म होने में थोड़ा ही समय बचा है। ऐसे में सभी अपने बही-खातों का हिसाब करने बिजी हैं। वहीं दूसरी तरफ आईटीआर दायर करना भी एक महत्वपूर्ण काम होता है। आइए जानते है कि आईटीआर और रिवाइस्ड आईटीआर फाइल करते समय आपके लिए किन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है।

आईटी रिटर्न फाइल करते समय सबसे महत्वपूर्ण होता है कि संशोधित आई-टी में दाखिल करने की समय सीमा तय की जाए। यह बेहद जरूरी है कि आप सही समय में आईटीआर दाखिल कर दें। रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई होती है। वहीं अगर आप रिवाइस्ड फाइलिंग कर रहे हैं तो उसकी तारीख अगले वित्त वर्ष की खत्म होने की तारीख होती है। उदाहरण के लिए आईटीआर भरने की आखिरी तारीख वित्त वर्ष 2016-2017 के लिए जुलाई 31, 2017 है, वहीं रिवाइस्ड फाइलिंग की आखिरी तारीख 31 मार्च 2018 होगी। साथ ही इस समय सीमा के अंदर रिवाइस्ड फाइलिंग आप कितनी ही बार सकते हैं।

असली रिटर्न्स की जानकारी रिवाइस्ड रिटर्न्स के साथ दें- असली आईटी रिटर्न्स से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी देना अनिवार्य है। रिवाइस्ड रिटर्न्स फाइलिंग के समय असली आईटीआर की तारीख और एक्नॉलेजमेंट नंबर भी मेंशन करें। यह भरना इसलिए भी अनिवार्य है क्योंकि आप बिना ओरिजनल आईटीआर फाइल करे रिवाइस्ड रिटर्न्स फाइल नहीं कर सकते।

रिविजन की इजाजत सिर्फ गलतियों पर- आप आईटीआर रिविजन सिर्फ पुरानी आईटीआर में हुई किसी गलती को सुधारने के लिए करते हैं। वहीं इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि गलती जानबूझकर किसी तरह का लाभ लेने की कोशिश में न की गई हो। गलत जानकारी देने पर आपको भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। जुर्माने की रकम 100 से 300 फीसद के बीच में भी हो सकती है।

रिवाइस्ड आईटीआर आपको जांच के दायरें में ला सकती है- रिवाइस्ड आईटीआर की सुविधा सिर्फ गलतियां सुधारने के लिए होती है। यदि विभाग को शक होता है कि रिवाइस्ड आईटीआर में कुछ गड़बड़ है तो फिर आप जांच के घेरे में आ सकते हैं। ऐसे में बेहतर यही होगा कि आप इनकम की सही जानकारी दें और कुछ भी छिपाने की कोशिश न करें।

रिवाइस्ड आईटीआर फाइलिंग की होने चाहिए कोई ठोस वजह- यह जरूरी है कि रिवाइस्ड आईटीआर फाइल करने की आपके पास कोई ठोस वजह हो और यह भी जरूरी है कि आप उस वजह को समझा सकें। उदाहरण के लिए अगर आपकी रिवाइस्ड आईटीआर में पुरानी आईटीआर की तुलना में ज्यादा इनकम दिखाई गई है तो आपको सही-सही बताना पड़ेगा कि क्यों यह जानकारी असली आईटीआर में नहीं दी और इसकी उसकी कोई ठोस वजह होने चाहिए।

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