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फसलों में कीटनाशक का छिड़काव करते वक्त रहें सावधान, कई गंभीर बीमारियों का है खतरा, यूं करें बचाव

कीटनाशक के इस्तेमाल से फसलों को रोग से तो बचाया ही जा सकता है बल्कि उत्पादन में भी इजाफा देखा गया है। हालांकि इनका उपयोग करने में कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए।

pesticidesकीटनाशकों के इस्तेमाल में जरूरी हैं ये सावधानियां

बीते कुछ दशकों में भारत में खेती में कीटनाशकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इनके इस्तेमाल से फसलों को रोग से तो बचाया ही जा सकता है बल्कि उत्पादन में भी इजाफा देखा गया है। हालांकि इनका उपयोग करने में कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए। फूड ऐंड एग्रिकल्चर ऑर्गनाईजेशन (FAO) के अनुसार यह जरूरी है कि छिड़काव में पड़ने वाली रसायन की मात्रा का उचित ध्यान रखा जाए ताकि इन जहरीले रसायनों से पर्यावरण पर होने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके। जैविक खेती भी इसका एक उचित विकल्प है। यह रासायनिक आवश्यकताओं को कम करता है और सस्टेनेबल यानि टिकाऊ, और पर्यावरणीय तरीके से पैदावार में सुधार करता है। जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ाने और जैविक खेती की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। आइए जानते हैं, कीटनाशकों के इस्तेमाल में कैसे और कितनी जरूरी है सावधानी…

कीटनाशक रसायन हमेशा पंजीकृत और अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें। साथ में बिल अवश्य लें।

कीटनाशकों को उनकी विषाक्तता के आधार पर खरीदें। लाल और पीले निशान वाले कीटनाशकों का छिड़काव करने से बचे। अधिकतर हरे या नीले निशान वाले कीटनाशकों का ही प्रयोग करें।

कीटनाशकों का किसी भी तरह के खाद्य पदार्थों को साथ मे स्टोर न करें। किसी भी कीटनाशक को सूंघने या चखने से बचें।

कीटनाशकों के प्रयोग के समय सुरक्षात्मक कपड़ों (पीपीआई) का उपयोग करें। (उदाहरण के लिए, चश्मे, पैर के मोज़े, मुंह के मुखौटे, सिर के कपड़े, आदि)

कीटनाशक का छिड़काव करते समय सावधानियां

बंद नोजल को मुँह से हवा देकर साफ न करें। इसे किसी तार या सुई के माध्यम से ही साफ करें। सुरक्षित जगह पर घोल बनाएँ। कीटनाशकों का घोल हाथ से कभी न बनाएँ। घोल बनाने लिए लंबी छड़ी/लकड़ी का प्रयोग करे।

बच्चों और अप्रशिक्षित व्यक्ति को छिड़काव न करने दें। छिड़काव के समय किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन न करें, न ही तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट आदि का प्रयोग करें। खाने पीने या धूम्रपान करने से पहले हाथ धो लें। छिड़काव वाली जगह पर खाद्य पदार्थ ना रखें।

भारी बारिश या बारिश के तुरंत बाद स्प्रे न करें। तेज़ हवा में भी कभी छिड़काव न करें। हमेशा हवा की दिशा में ही छिड़काव करें।

कीटनाशक के छिड़काव के बाद करें ये काम

छिड़काव कार्य पूरा होने के बाद हाथों को साबुन से धोकर साफ करें। छिड़काव के समय बच्चों और पालतू जानवरों को उस जगह से दूर रखें।

छिड़काव के दौरान उपयोग किए जाने वाले बर्तनों, कपड़ों आदि को अच्छी तरह से धोएं और ध्यान रखें, इन्हें नदी, नाले या कुएं पर न धोएँ क्योंकि इसे धोने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पानी जहरीला हो जाता है।

कीटनाशकों की खाली बोतलों को तोड़ कर किसी गड्डे मे दबा कर नष्ट करे। ऐसे ही कहीं न फेंकें। छिड़काव किए गए खेत मे चेतावनी जरूर लगा दें।

सावधानी न रखने पर हो सकते हैं ये रिस्क

रासायनिक दवाओं के अति सूक्ष्म कण हवा के साथ, श्वसन के दौरान शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

छिड़काव के दौरान, वे त्वचा के संपर्क में आने और आंखों के माध्यम से शरीर में चले जाते हैं।

छिड़काव के दौरान, कोई चीज खाने, सिगरेट या बीड़ी पीने के दौरान शरीर में जा सकते है।

ऐसे लक्षण दिखें तो समझ जाएं कीटनाशक का हुआ असर

– एनीमिया यानि खून की कमी महसूस हो सकती है। या चक्कर आ सकते है। त्वचा में जलन हो सकती है, बदबू के साथ तेज पसीना आ सकता है।
प्रभावित शरीर के भाग पर सूजन आ सकती है।

आँखों से कम और धुंधला दिखाई दे सकता है। उल्टी हो सकती है या जी मचला सकता है साथ ही पेट में दर्द भी हो सकता है। सिरदर्द, बेचैनी, बेहोशी, सांस फूलना, सीने में दर्द, खांसी आदि हो सकते है।

मार्केट में बिक रहा 25 पर्सेंट कीटनाशक पंजीकृत नहीं: आज भारत में उपलब्ध ढेर सारे कीटनाशक उत्पादों का पंजीकरण करना संभव नहीं है। 2015 में फिक्कीटाटा के स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट ग्रुप द्वारा तैयार किए गए एक अध्ययन के अनुसार, देश में एग्रो केमिकल उद्योग की कुल कीमत 27,000 करोड़ रुपये थी, जिसमे से अनुमानन २५% व्यापार गलत था अथवा अपंजीकृत कीटनाशकों का था।

कीटनाशकों के चलते गई कई किसानों की जान: देश में गलत और अपंजीकृत कीटनाशकों के उपयोग के कारण कई जिलों में किसान अपनी जान गंवा रहे हैं। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में पिछले साल कई किसानों ने कीटनाशक दूषित होने के कारण अपनी जान गंवा दी और कुछ किसान नेत्रहीन हो गए। इसका प्रमुख  कारण था कीटनाशकों का दुरूपयोग।  इसलिए यह जरुरी है की कीटनाशकों का प्रयोग करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाये तथा पूरी सावधानी बरती जाए।

(लेखक- मनोज कुमार जैन, नेशनल कोर्डीनेटर (कंटेंट), इफको किसान संचार लिमिटेड, दिल्ली)

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