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Yes Bank जैसे संकट में भी बचाए रखनी है गाढ़ी कमाई तो हमेशा पैसों को लेकर अपनाएं ये सावधानियां

Yes Bank crisis: मान लीजिए कि आपने एक ही बैंक अकाउंट में सारा अमाउंट जमा किया हुआ है और दुर्भाग्य से यस बैंक जैसे संकट आ जाए तो क्या होगा? ऐेसे में बेहतर यही है कि अलग-अलग खातों में रकम रखी जाए।

yes bankजानें, यस बैंक जैसे संकट से कैसे निपट सकते हैं आप

How to deal Yes Bank like crisis: कभी प्राइवेट सेक्टर के 5वें सबसे बड़े बैंक रहे Yes Bank के संकट में आने और आरबीआई की ओर से नियंत्रण स्थापित किए जाने के चलते लाखों लोग परेशान हैं। एटीएम से कैश नहीं निकल रहा, नेट बैंकिंग नहीं चल रही और क्रेडिट कार्ड से भी किसी तरह की ट्रांजेक्शन नहीं हो रही है। ऐसे भी ढेरों मामले सामने आए हैं, जिनकी लाखों रुपये की एफडी यस बैंक में है या फिर सेविंग्स अकाउंट में ही सारी पूंजी जमा है। इसकी वजह यह भी थी कि यस बैंक सेविंग्स अकाउंट पर ऊंची ब्याज दरों के लिए मशहूर था। हालांकि एक ही बैंक में इस तरह से बड़ी रकम जमा करना समझदारी नहीं कहा जा सकता। आइए जानते हैं, Yes Bank जैसे संकट से निपटने के लिए आप क्या कर सकते हैं…

एक ही टोकरी में न रखें सारे अंडे: निवेश योजनाओं को लेकर यह बात अकसर कही जाती रही है। किसी एक ही बैंक खाते में अपनी सारी पूंजी जमा करने या फिर एक ही निवेश योजना में पूरे पैसे लगाना हमेशा रिस्की माना जाता है। मान लीजिए कि आपने एक ही बैंक अकाउंट में सारा अमाउंट जमा किया हुआ है और दुर्भाग्य से यस बैंक जैसे संकट आ जाए तो क्या होगा? ऐेसे में बेहतर यही है कि अलग-अलग खातों में रकम रखी जाए।

टुकड़ों में करें निवेश: मान लीजिए कि आपने किसी बैंक में 20 लाख रुपये की एफडी की है और वह डूब जाता है तो क्या होगा? सरकार के नियम के मुताबिक किसी भी बैंक के डूबने की स्थिति में 5 लाख रुपये तक की निवेशकों की रकम सुरक्षित होगी यानी इससे ज्यादा होने पर भी 5 लाख ही वापस मिल पाएंगे। ऐसे में जरूरी है कि आप एक जगह यदि 5 लाख की एफडी कराएं तो कहीं और कुछ अन्य निवेश करें।

एक ही कंपनी के शेयर न खरीदें: ऐसी ही स्थिति कई बार शेयर मार्केट में भी होती है। एक ही कंपनी के शेयरों में पैसा लगाने पर कभी आप अचानक मालामाल हो जाते हैं, लेकिन यदि उसी कंपनी के शेयरों में गिरावट आती है तो फिर हालात बिगड़ जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि अलग-अलग कंपनियों शेयरों में निवेश किया जाए ताकि कहीं के घाटे को कहीं और के मुनाफे के साथ बैलेंस किया जा सके।

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