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मुकेश अंबानी के हाथों बिकेगा बिग बाज़ार! जानिए कैसे किशोर बियानी ने खड़ा किया था रिटेल बिजनेस का साम्राज्य

Kishore Biyani's Big Bazaar success story: देश की दिग्गज रिटेल चेन कंपनी फ्यूचर ग्रुप को मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाला रिलायंस इंडस्ट्रीज खरीद सकता है। साड़ियों का कारोबार करने वाले मारवाड़ी परिवार में जन्मे किशोर बियानी की कहानी फर्श से अर्श तक पहुंचने की रही है।

big bazaarजानें, कैसे किशोर बियानी ने खड़ा किया था बिग बाजार का साम्राज्य

देश की दिग्गज रिटेल चेन कंपनी फ्यूचर ग्रुप को मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाला रिलायंस इंडस्ट्रीज खरीद सकता है। साड़ियों का कारोबार करने वाले मारवाड़ी परिवार में जन्मे किशोर बियानी की कहानी फर्श से अर्श तक पहुंचने की रही है। पैंटालून, बिग बाजार, फूड बाजार समेत कई रिटेल चेन के मालिक किशोर बियानी अब अपने कारोबार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को बेचने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक रिलायंस के साथ बातचीत आखिरी दौर में है। सूत्रों के मुताबिक इस डील के तहत फ्यूचर ग्रुप का पूरा रिटेल बिजनेस ही रिलायंस को हाथों में जा सकता है। इसमें FBB, बिग बाजार, फूड बाजार, सेंट्रल, फ्चूयर लाइफस्टाइल आदि शामिल हैं। इनमें से सबसे बड़ा नाम बिग बाजार ब्रैंड का है, जो देश में एक ही छत के नीचे सभी जरूरी सामान मुहैया कराने के लिए बीते दो दशकों से चर्चित रहा है। आइए जानते हैं, कैसे किशोर बियानी ने खड़ा किया था बिग बाजार का साम्राज्य…

किशोर बियानी ने 1987 में पैंटालून की शुरुआत की थी, जिसे 2012 में उन्होंने आदित्य बिड़ला ग्रुप को कर्ज के चलते बेच दिया था। इस ब्रैंड के जरिए ही नाम कमाने वाले किशोर बियानी ने कोलकाता से बिग बाजार की शुरुआत की थी। इसके तुरंत बाद बेंगलुरु और हैदराबाद में बिग बाजार की शुरुआत की गई थी। फिर क्या था बिग बाजार का कारवां देश के लगभग हर बड़े शहर तक पहुंचा।

सबसे सस्ता, सबसे अच्छा की टैगलाइन से शुरू किए बिग बाजार के कारोबार को किशोर बियानी ने नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था। उनके फ्यूचर ग्रुप का टर्वओवर 9,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा और वह खुद भारत के 100 अमीरों की सूची में 2017 में 55वें पायदान पर पहुंच गए। हालांकि इस विस्तार के साथ ही फ्यूचर ग्रुप के फ्यूचर पर बढ़ते कर्ज के चलते आशंकाओं के बादल छाने लगे। फोर्ब्स के मुताबिक बियानी फैमिली की दौलत 1.8 बिलियन डॉलर से घटकर 400 मिलियन डॉलर पर आकर ठहर गई है।

दिसंबर, 2019 में समाप्त हुई तिमाही में फ्यूचर रिटेल के प्रॉफिट में 15 पर्सेंट की गिरावट आई थी, जबकि रेवेन्यू में भी 3 पर्सेंट की कमी देखने को मिली है। जानकारों के मुताबिक किशोर बियानी की समस्या का यह सिर्फ एक ही पहलू है। कोरोना के संकट के चलते बियानी के कारोबार में और इजाफा हुआ है और बात बिजनेस को बेचने तक आ पहुंची है।

रेटिंग एजेंसी ICRA ने मार्च में बियानी की कंपनी को नेगेटिव रेटिंग दी थी। आईसीआरए ने रेटिंग देते हुए कहा था कि कंपनियों पर लगातार कर्ज में इजाफा हुआ है और यह आंकड़ा अब 12,778 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सितंबर, 2019 में 10,951 करोड़ रुपये ही था। किशोर बियानी और उनके परिवार की ग्रुप में करीब 33.5 पर्सेंट की हिस्सेदारी है, लेकिन इसमें से बड़े हिस्से को उन्होंने गिरवी रखा हुआ है।

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