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बियानी फैमिली को 15 साल तक रिटेल बिजनेस से रहना होगा बाहर, मुकेश अंबानी से फ्यूचर ग्रुप की डील में हुआ करार

विशेषज्ञों की माने तो ज्यादातर नॉन कंपीट एग्रीमेंट 3 से 5 वर्ष के लिए मान्य होते हैं। संभव है कि फ्यूचर ग्रुप के आर्थिक संकट में घिरने के चलते यह अवधि बढ़ गई हो।

Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: September 3, 2020 10:33 AM
मुकेश अंबानी और फ्यूचर ग्रुप के किशोर बियानी

फ्यूचर ग्रुप के मुखिया किशोर बियानी या उनके परिवार का कोई सदस्य 15 साल तक रिटेल कारोबार में नहीं उतर सकेंगे। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस इंडस्ट्रीज को रिटेल बिजनेस बेचने की डील में यह करार भी हुआ है। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले दो करीबी सूत्रों के हवाले से इकनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि डील के नॉन कंपीट क्लॉज के मुताबिक किशोर बियानी परिवार 15 वर्ष के लिए रिटेल बिजनेस में नहीं आ सकता। डील के मुताबिक न तो किशोर बियानी और न ही उनके परिवार का कोई अन्य सदस्य रिटेल बिजनेस सेगमेंट में काम कर सकता है।

हालांकि होम रिटेलिंग के मामले कुछ अपवाद हो सकते हैं, जहां पर रिलायंस की अभी तक कोई मौजूदगी नहीं है। यह डील सभी मौजूदा रिटेल बिजनेस पर मान्य होगी, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम हैं। इसके अलावा किशोर बियानी Praxis Retail के भी मालिक हैं। यह कंपनी देश भऱ में 48 होमटाउन स्टोर्स का संचालन करती है, जिनका बीते वित्त वर्ष में 702 करोड़ रुपये रेवेन्यू था।
Praxis Retail फ्यूचर ग्रुप की रिलायंस के साथ हुई डील का हिस्सा भी नहीं है। इस मामले में विशेषज्ञों की माने तो ज्यादातर नॉन कंपीट एग्रीमेंट 3 से 5 वर्ष के लिए मान्य होते हैं। संभव है कि फ्यूचर ग्रुप के आर्थिक संकट में घिरने के चलते यह अवधि बढ़ गई हो।

किशोर बियानी को 15 सालों तक के लिए रिटेल सेक्टर में एंट्री से रोकने का क्लॉज डील में शायद पुराने अनुभवों के चलते भी जोड़ा गया हो। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब किसी कारोबारी ने अपने जिस बिजनेस को बेचा था, उसी सेगमेंट में कुछ वक्त बाद दोबारा बिजनेस शुरू किया। जैसे कपड़ों के ब्रांड Biba के सह-संस्थापक संजय बिंद्रा ने अपनी हिस्सेदारी बेचने के एक महीने के बाद ही Seven East के नाम से नया ब्रांड शुरू किया। इसी तरह पारस फार्मा के प्रमोटर ने कंपनी की ज्यादातरह हिस्सेदारी 2006 में बेची थी और फिर 2010 में दोबारा फार्मा सेक्टर में ही नई कंपनी Vini Cosmetics के जरिए एंट्री की।

क्या होगा ग्रुप का फ्यूचर बिजनेस: फ्यूचर ग्रुप इस डील के बाद अपना ध्यान FMCG प्रोडक्ट्स और फैशन व्यापार पर दे सकता है। एक स्टेटमेंट में फ्यूचर ग्रुप ने कहा भी है कि इस डील के बाद फ्यूचर इंटरप्राइजेज लिमिटेड FMCG प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन पर मजबूती से काम करेगी। इसके बाद फ्यूचर ग्रुप का पूरा जोर फैशन मर्चेंडाइजिंग पर रहेगा। जानकारों की माने तो रिलायंस रिटेल के साथ सप्लाई डील के बाद फ्यूचर ग्रुप के FMCG प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में मजबूती से उबरने की उम्मीद है। बियानी के पुराने मित्र और प्रतिस्पर्धी का यह भी कहना है कि बियानी नए-नए प्रयत्न करने के लिए जाने जाते हैं। नॉन-कंपीट क्लॉज की वजह से अगर बियानी रिटेल बिजनेस से दूर भी हो गए तो हो सकता है वह किसी नए बिजनेस में हाथ आजमाएं।

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